चिंताजनक: इस एक चूक ने बढ़ा दिया बच्चों में जानलेवा बीमारियों का खतरा, पांच दशकों की मेहनत पर फिरा पानी
- साल 2010 के बाद से, कई देशों अचानक से टीकाकरण में गिरावट दर्ज की गई जिसके कारण बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है।
- इससे पहले पांच दशकों (50 साल) में दुनियाभर में बच्चों के टीकाकरण को लेकर देखे गए बेहतर कवरेज के चलते करीब 154 मिलियन (15.4 करोड़) बच्चों की मौतों को रोका गया था।
विस्तार
Vaccination Rate Declining: वैश्विक स्तर पर कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं, सभी उम्र के लोगों पर इसका नकारात्मक असर भी देखा गया है। इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट बच्चों में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों के खतरे को लेकर अलर्ट कर रही है।
द लैंसेट में प्रकाशित एक विश्लेषण से पता चलता है कि दुनियाभर में लाखों बच्चे जानलेवा बीमारियों के खतरे में हैं, उनमें पहले की तुलना में गंभीर और संक्रामक बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ गया है। कारण- स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं और गलत सूचना के चलते हाल के वर्षों में टीकाकरण कवरेज में आई कमी।
विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि पिछले एक दशक में कई देशों में टीकाकरण की गति में काफी कमी आ गई है, लिहाजा बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले पांच दशकों (50 साल) में दुनियाभर में बच्चों के टीकाकरण को लेकर देखे गए बेहतर कवरेज के चलते करीब 154 मिलियन (15.4 करोड़) बच्चों की मौतों को रोका गया था। लेकिन साल 2010 के बाद से, कई देशों अचानक से टीकाकरण में गिरावट दर्ज की गई जिसके कारण बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है।
वैक्सीनेशन कवरेज में कमी चिंताजनक
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 204 देशों में से 100 में खसरे के टीकाकरण की दर में गिरावट आई है। वहीं डिप्थीरिया, टिटनस, काली खांसी, पोलियो और टीबी के खिलाफ वैक्सीनेशन कवरेज 36 उच्च आय वाले देशों में से 21 में कम हो गया है। इसमें फ्रांस, इटली, जापान, यूके और यूएस जैसे देश भी शामिल हैं।
सिएटल स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के लेखकों ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य चुनौतियों ने इस स्थिति को और भी गंभीर कर दिया। लिहाजा लाखों बच्चे रोके जा सकने वाली बीमारियों और मृत्यु के प्रति संवेदनशील हो गए हैं।
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पिछले 10 वर्षों में टीकाकरण में भारी गिरावट
वाशिंगटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और वरिष्ठ अध्ययन लेखक डॉ. जोनाथन मोसर ने कहा, पिछले 50 वर्षों के शानदार प्रयासों के बावजूद, हमने 10 वर्षों में टीकाकरण में जो कमी देखी है उसने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है बड़ी संख्या में बच्चे कम या बिना टीकाकरण के रह गए हैं।
बचपन में होने वाला नियमित टीकाकरण, सबसे शक्तिशाली और लागत प्रभावी उपाय है जो भविष्य में गंभीर बीमारियों से आपको बचाए रखने में मददगार हो सकता है। हालांकि लगातार बढ़ती वैश्विक असमानताएं, कोविड महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियां और टीके के बारे में गलत सूचना तथा झिझक ने टीकाकरण की प्रगति में बाधा उत्पन्न की है।
रोके जा सकने वाली बीमारियों का बढ़ा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, ये रिपोर्ट खसरा, पोलियो और डिप्थीरिया जैसी टीके से रोके जा सकने वाली बीमारियों के होने वाले संभावित खतरे को लेकर अलर्ट करती है। इसे दुनियाभर में स्पष्ट चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए। हम साल 2030 के लिए निर्धारित वैश्विक टीकाकरण लक्ष्य तब तक पूरा नहीं हो पाएंगे जब तक कि स्थिति को बदलने के लिए तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती।
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पोलियो जैसी बीमारियों के मामले में आई वृद्धि
टीकाकरण में आई कमी के ही कारण अफगानिस्तान और पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में पोलियो के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। पापुआ न्यू गिनी में भी पोलियो का प्रकोप है, जहां आधी से भी कम आबादी का टीकाकरण हुआ है।
- 2024 में, यूरोप में खसरे के संक्रमण में लगभग दस गुना वृद्धि दर्ज की गई।
- मई 2025 में अमेरिका में खसरे के प्रकोप के कारण 30 स्टेट्स में 1,000 से अधिक मामले सामने आए, ये काफी चिंताजनक है।
वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, टीकाकरण बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमारे सबसे शक्तिशाली उपकरणों में से एक है, लेकिन यह तभी प्रभावी रह सकता है जब इसकी निरंतर और समानता बनी रहती है।
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स्रोत
Global, regional, and national trends in routine childhood vaccination coverage from 1980 to 2023 with forecasts to 2030: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2023
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