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Skin Cancer: भारतीयों में स्किन कैंसर का कितना खतरा? कैंसर विशेषज्ञ ने बताया बचाव का जादुई 'ABCDE' फॉर्मूला

Thu, 28 Aug 2025 09:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 28 Aug 2025 09:02 PM IST
सार

  • ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के विश्वकप विजेता पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क स्किन कैंसर से पीड़ित हैं।
  • शोध बताते हैं कि पश्चिमी देशों में हर साल लाखों लोग त्वचा के कैंसर का शिकार होते हैं। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में तो यह सबसे आम कैंसर बन चुका है।
  • इसकी तुलना में भारत में आंकड़े काफी कम हैं।  भारत में स्किन कैंसर के मामले सभी कैंसरों का सिर्फ 1 से 2% ही हैं।

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michael clarke skin cancer common in australia america know prevention tips in india
स्किन कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com

विस्तार

Michael Clarke Skin Cancer: भले ही मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की कर ली है, पहले की तुलना में अब अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध हैं फिर भी कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है। कैंसर से हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। आमतौर पर ब्रेस्ट, फेफड़े, लिवर, कोलन कैंसर की खूब चर्चा होती है पर स्किन कैंसर पर लोगों का कम ही ध्यान जाता है। विशेषतौर पर भारत जैसे देशों में जहां स्किन कैंसर, पश्चिम की तुलना में कम है पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। 

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शोध बताते हैं कि पश्चिमी देशों में हर साल लाखों लोग स्किन कैंसर का शिकार होते हैं। यूएस-यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में तो यह सबसे आम कैंसर बन चुका है। इसका मुख्य कारण उनकी गोरी त्वचा को माना जाता है। गोरी त्वचा में मेलेनिन नामक प्राकृतिक रंग कम होता है। मेलेनिन हमारे शरीर की वह प्राकृतिक ढाल है, जो सूरज की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से त्वचा की रक्षा करती है।
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जब यह ढाल कमजोर हो जाती है, तो ये किरणें सीधे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं और समय के साथ कैंसर पैदा कर सकती हैं।

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कैंसर के बढ़ते मामले - फोटो : Adobe stock photos

स्किन कैंसर से पीड़ित हैं माइकल क्लार्क

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क स्किन कैंसर से पीड़ित हैं। क्लार्क ने बुधवार (27 अगस्त) को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट करके इस खतरनाक कैंसर से बचाव करते रहने की सभी को सलाह दी है। खबरों के मुताबिक वह साल 2006 से इस कैंसर का शिकार हैं और अब तक उनकी कई बार सर्जरी हो चुकी है। 
 

 

 

 

 

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सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में उन्होंने लिखा- त्वचा कैंसर सच है! खासकर ऑस्ट्रेलिया में। अपनी त्वचा की जांच जरूर करवाएं, यह एक जरूरी रिमाइंडर है। रोकथाम करते रहना इलाज से बेहतर है, नियमित जांच और जल्दी पता लगाना कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है।

पश्चिमी देशों में त्वचा के कैंसर के मामले

मेडिकल रिपोर्ट्स पर गौर करें तो पता चलता है कि भारत में स्किन कैंसर के मामले पश्चिमी देशों की तुलना में फिलहाल कम हैं। हमारी त्वचा में मेलेनिन की मात्रा ज्यादा होती है, जो हमें एक प्राकृतिक सुरक्षा देती है। लेकिन खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। धूप में काम करने वाले लोग, खासतौर पर किसान और मजदूर या फिर वे लोग जो कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और ज्यादा केमिकल वाली चीजों के संपर्क में रहते हैं उनमें इसका जोखिम हो सकता है।

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स्किन कैंसर - फोटो : Freepik.com

स्किन कैंसर के इन आंकड़ों पर डालिए नजर

आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में हर साल 20 लाख से ज्यादा लोग स्किन कैंसर से प्रभावित होते हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में तो यह कैंसर सबसे आम प्रकार का कैंसर माना जाता है, जहां लगभग हर तीसरे व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी स्किन कैंसर का खतरा रहता है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, सबसे खतरनाक स्किन कैंसर मेलानोमा  के मामले पश्चिमी देशों में लगातार बढ़ रहे हैं। अमेरिका में अकेले हर साल लगभग 1 लाख नए मामले सिर्फ मेलानोमा के दर्ज किए जाते हैं।

इसकी तुलना में भारत में आंकड़े काफी कम हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, भारत में स्किन कैंसर के मामले सभी कैंसरों का सिर्फ 1 से 2% ही है। 

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यूवी रेज और स्किन कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं कैंसर विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ विभोर सैनी कहते हैं, भले ही भारत में इस कैंसर का खतरा कम हो, लेकिन सभी लोगों को सावधानी बरतना जरूरी है।

  • स्किन कैंसर से बचाव के लिए सबसे जरूरी है सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। धूप में निकलने से पहले, गर्मियों में कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन रोज लगाएं। सुबह 10 से शाम 4 बजे के बीच की धूप में यूवी किरणें सबसे तेज होती हैं। इस समय बाहर कम जाएं या छाता/टोपी का इस्तेमाल करें।
  • अगर आपका काम ज्यादा देर धूप में रहने का है तो शरीर को अच्छे से कवर करने वाले कपड़े पहनें। अगर आपकी त्वचा पर कोई तिल, त्वचा पर कोई नया धब्बा या गांठ हो या फिर त्वचा के रंग में कोई असामान्य से बदलाव वाला पैच दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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स्किन कैंसर के लक्षणों पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com

त्वचा में कैंसर का पता लगाने वाला  'ABCDE' फॉर्मूला

न्यूयॉर्क पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा पटेल शाह कहती हैं, मैं सुझाव दूंगी कि सभी लोग घर पर ही (शीशा या घर पर किसी की सहायता से) त्वचा की स्वयं से जांच करते रहें। जननांग, हथेलियों, नाखूनों और स्तनों के नीचे और उंगलियों के बीच के हिस्से में विशेष ध्यान देना चाहिए। त्वचा कैंसर का पता लगाने में 'ABCDE' फॉर्मूले से काफी मदद मिल सकती है।

  • ए (एसिमेट्री या विषमता)- त्वचा का एक हिस्सा जो अलग दिखता है।
  • बी (बॉर्डर)- त्वचा में ये बदलाव या तिल के किनारे वाले हिस्से अस्पष्ट या अनियमित होते हैं।
  • सी (कलर)- तिल के रंग अनियमित होते हैं या एक ही तिल में कई रंग हो सकते हैं।
  • डी (डाइमीटर)- इसकी चौड़ाई लगभग एक पेंसिल इरेजर के आकार की होती है, जो ¼ इंच से ज्यादा हो सकती है।
  • ई (इवॉल्विंग)- त्वचा में इन बदलावों आकार, माप और रंग समय के साथ बदलते रहते हैं।


अगर आपको त्वचा में कुछ असामान्य या 'ABCDE' फॉर्मूले जैसा कुछ दिखाई देता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर की मदद लें। त्वचा पर इस तरह के बदलावों पर ध्यान देते रहना उन लोगों के लिए और भी जरूरी है जिनके परिवार में पहले से किसी को त्वचा कैंसर रहा है या फिर जिनकी प्रतिरक्षा-प्रणाली कमजोर है।




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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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