फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   latest study says Chewing gum releases hundreds of tiny plastic in mouth cause chronic disease risk

Study: च्युइंग गम चबाने से शरीर में बढ़ रहा है माइक्रोप्लास्टिक, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का हो सकता है खतरा

Sat, 29 Mar 2025 12:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 29 Mar 2025 12:47 PM IST
सार

हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों की टीम ने चेताया है कि जो लोग अक्सर  च्युइंग गम चबाते रहते हैं उन्हें सावधान हो जाना चाहिए। अध्ययन में पाया गया है कि च्युइंग गम चबाने से सैकड़ों माइक्रोप्लास्टिक्स रिलीज होते हैं जो समय के साथ शरीर में बढ़ते जाते हैं। इससे क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बन सकता है। 

विज्ञापन
latest study says Chewing gum releases hundreds of tiny plastic in mouth cause chronic disease risk
च्युइंग गम चबाने से शरीर में बढ़ रहा है माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : Freepik.com

विस्तार

दुनियाभर में बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों के लिए लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी को प्रमुख कारण बताया जाता रहा है। कई पर्यावरणीय स्थितियां भी हैं जो समय के साथ बीमारियों के खतरे को बढ़ा रही हैं। कई अध्ययन लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि इंसानी शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिसपर अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो ये आने वाले दशकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 

विज्ञापन


अमर उजाला में इसी महीने प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह से हमारे घरों में इस्तेमाल की जाने वाली रोजमर्रा की चीजें शरीर में माइक्रोप्लास्टिक बढ़ाती जा रही हैं।
विज्ञापन


इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों की टीम ने चेताया है कि जो लोग अक्सर च्युइंग गम चबाते रहते हैं उन्हें भी सावधान हो जाना चाहिए। अध्ययन में पाया गया है कि च्युइंग गम चबाने से सैकड़ों माइक्रोप्लास्टिक्स रिलीज होते हैं। समय के साथ ये शरीर में बढ़ता जा रहा है और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बन सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

latest study says Chewing gum releases hundreds of tiny plastic in mouth cause chronic disease risk
च्युइंग गम चबाने से रिलीज होता है माइक्रोप्लास्टिक्स - फोटो : Freepik.com

च्युइंग गम चबाने की आदत बढ़ा न दे मुश्किल

23-27 मार्च को आयोजित अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (एसीएस) की एक बैठक में इस अध्ययन की रिपोर्ट पर चर्चा की गई, जिसमें शोधकर्ताओं ने च्युइंग गम चबाने की आदत को समस्याकारक बताया है। अध्ययन में पाया गया कि केवल एक ग्राम च्युइंग गम से औसतन 100 माइक्रोप्लास्टिक रिलीज हो सकते हैं, वहीं कुछ से 600 से अधिक सूक्ष्म प्लास्टिक भी निकलते पाए गए हैं। 

विशेषज्ञों ने बताया कि एक व्यक्ति जो साल में लगभग 180 च्युइंग गम चबाता है, वह 30,000 माइक्रोप्लास्टिक्स निगल सकता है। पांच ब्रांड के सिंथेटिक और पांच प्राकृतिक गम के परीक्षण में पाया गया है कि इन दोनों में माइक्रोप्लास्टिक्स की मौजूदगी थी। 

रोजमर्रा की चीजों में माइक्रोप्लास्टिक

यह अध्ययन ऐसे समय में किया गया है जब शोधकर्ता शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की बढ़ती मात्रा को लेकर पहले से बहुत चिंतित हैं। किचन में इस्तेमाल होने वाले सामनों से लेकर, प्लास्टिक के बोतल तक सभी के माध्यम से शरीर में इस खतरे को बढ़ते हुए देखा जा रहा है। यहां तक कि हम जिस हवा में सांस लेते हैं उसमें भी माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी देखी गई है। 

इससे पहले के अध्ययन में हमारे फेफड़े, रक्त और मस्तिष्क के अंदर भी माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी को लेकर अलर्ट किया गया था जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर होने का खतरा हो सकता है।

latest study says Chewing gum releases hundreds of tiny plastic in mouth cause chronic disease risk
च्युइंग गम को लेकर अध्ययन में अलर्ट - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

इस नए अध्ययन के पीछे मुख्य शोधकर्ता संजय मोहंती ने कहा, "मैं लोगों को डराना नहीं चाहता, लेकिन ये डरने वाली बात जरूर है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि सुपरमार्केट में बिकने वाली सबसे आम च्युइंग गम को सिंथेटिक गम कहा जाता है, जिसमें चबाने लायक प्रभाव पाने के लिए पेट्रोलियम आधारित पॉलिमर मिलाए जाते हैं। हालांकि पैकेजिंग में इंग्रेडिएंट्स की लिस्ट में किसी भी प्लास्टिक की सूची नहीं दी जाती है।

ब्रिटेन के पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डेविड जोन्स ने कहा कि वे इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि अध्ययनों में कुछ ऐसे प्लास्टिक भी मिले हैं जिनके बारे में ज्ञात ही नहीं था कि वे इन गम्स में हो सकते हैं।

latest study says Chewing gum releases hundreds of tiny plastic in mouth cause chronic disease risk
ब्रेन में मिला माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : Amarujala.com

मस्तिष्क में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक को लेकर जताई गई चिंता

शोधकर्ताओं ने बताया कि प्लेसेंटा, रक्त, ब्रेस्ट मिल्क, लिवर-किडनी के साथ इंसानों के मस्तिष्क में भी माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ती हुई देखी गई है। ब्रेन में माइक्रोप्लास्टिक के कारण मस्तिष्क की मूल संरचना में बदलाव हो रहा है, जिसके चलते डिमेंशिया के अलावा स्ट्रोक-हार्ट अटैक से मौत का जोखिम 4.5 गुना तक बढ़ सकता है।

इसी तरह एक अध्ययन में मां के दूध में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया था। स्तन के दूध में माइक्रोप्लास्टिक मिलने के पहले एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने मानव रक्त में भी माइक्रोप्लास्टिक्स पाए जाने को लेकर अलर्ट किया था। 
 

(ये भी पढ़िए- लिवर-किडनी और रक्त के बाद अब ब्रेन में मिले प्लास्टिक के छोटे कण)

latest study says Chewing gum releases hundreds of tiny plastic in mouth cause chronic disease risk
प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल और माइक्रोप्लास्टिक का खतरा - फोटो : Adobe Stock

प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल कितना खतरनाक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार प्लास्टिक के डब्बे में खाना खाने और प्लास्टिक के बोतलों से पानी पीने से बचने की चेतावनी देते रहे हैं। प्लास्टिक की चीजों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण न सिर्फ शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ती जा रही है साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बिस्फेनॉल ए (बीपीए) नामक रसायन भी चिंता का कारण बना हुआ है।

भारतीय ब्रांड वाले नमक और चीनी में भी माइक्रोप्लास्टिक्स हो सकते हैं। नमक और चीनी चाहे पैक्ड हों या अनपैक्ड लगभग सभी में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं। गौरतलब है कि माइक्रोप्लास्टिक्स को कैंसर के प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है।



----------
स्रोत और संदर्भ
Chewing gum can shed microplastics into saliva, pilot study finds


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed