Cancer Risk: दो दशकों में 75% तक बढ़ सकती हैं कैंसर से मौतें, इन देशों पर मंडरा रहा है गंभीर संकट
- द लैंसेट के हालिया रिपोर्ट में कैंसर के बढ़ते जोखिमों और इससे मौत के खतरों को लेकर लोगों को अलर्ट किया गया है।
- शोध बताते हैं कि आने वाले दशकों में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है। मौजूदा समय में कैंसर से होने वाली मौतें पहले से ही करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही हैं
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विस्तार
Cancer Mortality: कैंसर वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है, इसका खतरा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। हाल के दशकों में कम उम्र के लोगों में भी न सिर्फ कैंसर के मामले बढ़े हैं, बल्कि इससे मौतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
भारतीय आबादी भी तेजी से कैंसर की चपेट में आ रही है। साल 2022 में देश में कैंसर के मामलों की अनुमानित संख्या लगभग 1.46 मिलियन (14.6 लाख) थी जो 2025 तक बढ़कर 15 लाख से अधिक हो गई है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 1,00,000 लोगों में से 100 लोगों में कैंसर का पता चल रहा है। कैंसर को वैश्विक स्तर पर मृत्यु का भी प्रमुख कारण माना जाता रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और कई अन्य शोध बताते हैं कि आने वाले दशकों में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है। मौजूदा समय में कैंसर से होने वाली मौतें पहले से ही करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही हैं, अब विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 25 वर्षों यानी साल 2050 तक यह आंकड़ा 75% तक बढ़ सकता है।
द लैंसेट के हालिया रिपोर्ट में कैंसर के बढ़ते जोखिमों और इससे मौत के खतरों को लेकर लोगों को अलर्ट किया गया है।
2050 तक बढ़ सकते हैं कैंसर और मौत के मामले
अध्ययनकर्ता बताते हैं, कैंसर के बढ़ते मामले और इससे मौत के खतरे को पीछे हमारी बदलती जीवनशैली सबसे बड़ा कारण है। अस्वस्थ खानपान, धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी वाले लोग कैंसर का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा प्रदूषण, रासायनिक पदार्थों का संपर्क और बढ़ती उम्र भी कैंसर के मामले और इससे मौत के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
शोध में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बताया कि दुनियाभर में नए कैंसर के मामलों की संख्या 1990 के बाद से दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 2023 में 1.85 करोड़ से अधिक हो गई है। अगले दो दशकों में कैंसर से होने वाली मौतों में 75 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की आशंका जताई गई है, जोकि चिंताजनक है।
इन आंकड़ों पर डालिए नजर
इस अध्ययन में 1990 से 2023 के बीच 204 देशों में 47 प्रकार के कैंसर के मामलों और इससे मृत्युदर का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि लेबनान में 33 वर्षों की अवधि में कैंसर के मामलों और मृत्यु दोनों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई, जो 80 प्रतिशत थी। इक्वेटोरियल गिनी और लाओस में कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में क्रमशः 72 और 55.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कजाकिस्तान में कैंसर से मृत्यु दर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, जहां मामलों में 58.2 प्रतिशत की गिरावट आई। संयुक्त अरब अमीरात में ये गिरावट 56 प्रतिशत की है। ब्रिटेन में मृत्यु दर में 23.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में क्रमशः 32.5 और 33.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
मोटापे और धूम्रपान कैंसर और मौत का सबसे बड़ा कारण
भारत में 1990 से 2023 के बीच कैंसर के मामलों में 24% की बढ़ोतरी देखी गई है।
इस नई वैश्विक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं का दावा है कि बढ़ती और वृद्ध होती आबादी के साथ लोगों की अस्वास्थ्यकर जीवनशैली इस समस्या को बढ़ा रही है। कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या 74 प्रतिशत बढ़कर 1.04 करोड़ से अधिक हो गई है। साल 2050 तक इसके और भी बढ़कर 3.05 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
वैज्ञानिकों ने कहा, ये बीमारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त बोझ बढ़ाने वाली है जिसको लेकर सभी सरकारों को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। मोटापे और धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों से निपटकर वैश्विक कैंसर के बोझ पर नियंत्रण पाया जा सकता है, इसको लेकर सभी लोगों को भी अलर्ट रहना चाहिए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों ने कहा, कैंसर स्क्रीनिंग का विस्तार और लोगों तक इसकी पहुंच आसान बनाने की जरूरत है ताकि कैंसर का जल्द पता लगाने और रोगियों के जीवित रहने की संभावना बढ़ाने में मदद मिल सके।
कैंसर रिसर्च यूके की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मिशेल मिशेल कहती हैं, दुनियाभर में कैंसर के मामलों और मौतों की संख्या बढ़ रही है, अकेले ब्रिटेन में लगभग 1100 नए मामले सामने आ रहे हैं।
कैंसर से ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने के लिए, हमें रोकथाम पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है। धूम्रपान कैंसर और मौत का प्रमुख कारण बना हुआ है, इसलिए तंबाकू की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
कैंसर की रोकथाम के लिए व्यापक उपायों को अपनाने की जरूरत
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 2023 में दुनियाभर में स्तन कैंसर, दोनों लिंगों में संयुक्त रूप से सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मौजूदा चुनौती सिर्फ बीमारी को पहचानने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर इलाज और संसाधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। खासकर विकासशील देशों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, वहां कैंसर से होने वाली मौतों का खतरा और ज्यादा है। वहीं, इलाज महंगा होने के कारण कई लोग बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक दुनिया में कैंसर मौतों का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग समय पर जांच करवाएं, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और सरकारें बेहतर इलाज की सुविधा और जागरूकता अभियान पर जोर दें।
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स्रोत
The global, regional, and national burden of cancer, 1990–2023, with forecasts to 2050: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2023
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