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कोरोना को मात देने के लिए किया जा रहा है इनहेलर परीक्षण, जानें इसके बारे में सबकुछ
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Wed, 13 Jan 2021 07:14 PM IST
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कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई के लिए शुरुआत से हम लोग शारीरिक दूरी और मास्क का इस्तेमाल करते हुए आ रहे हैं, जिसके चलते काफी संख्या में लोग इस वायरस से बचे हुए हैं। वही, जो लोग अस्पतालों में भर्ती हुए उनका इलाज किया गया ताकि वो इस वायरस को मात दे सके। इन सबके बीच लोगों को इस वायरस से गंभीर रूप से बीमार होने से बचाने के लिए ब्रिटेन के अस्पतालों में व्यापक स्तर पर इनहेलर आधारित एक परीक्षण शुरू किया गया है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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दरअसल, पूरे विश्व में जो लोग कोरोना वायरस महामारी से गंभीर रूप से संक्रमित हैं, उनके इलाज के लिए तरह-तरह के कार्य किए गए। लेकिन अब ब्रिटेन के अस्पतालों में इनहेलर आधारित परीक्षण शुरू किया गया है, जिसके तहत इसमें जो इनहेलर इस्तेमाल किया जाएगा उससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय हो जाती है और मुख्य कोशिकाएं वायरस से लड़ने के लिए तैयार हो जाती हैं।
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इंटेरोफेरोन बीटा 1ए (एनएनजी0001) नाम के एक प्रोटीन का इस्तेमाल इस प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है। सायनेयरजेन एसजी018 परीक्षण करीब 20 देशों में किया जा रहा है, जिसके तहत कोरोना वायरस के ऐसे 610 मरीजों को शामिल किया गया है, जिन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत है। अध्ययन के शुरूआती नतीजों से पता चला है कि ये उपचार अस्पतालों में कोरोना के मरीजों के लिए वेंटिलेटर की जरूरत को करीब 80 प्रतिशत तक कम कर देगा। कंपनी की तरफ से ये भी कहा गया कि, वो इस वक्त दूसरे चरण का परीक्षण कर रही है।
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सायनेयरजेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड मार्सडेन ने कहा कि, "सार्स-कोविड-2 (कोविड-19) जैसे जानलेवा विषाणुओं से निपटने के लिए हमें इलाज की जरूरत है। हमने जो उपचार विकसित किए हैं, उस तरह की पद्धति उन मामलों में जरूरी बनी रहेंगी, जिन मरीजों का टीकाकरण नहीं किया गया हो और साथ ही उन मामलों में भी, जिनमें वायरस का स्वरूप बदल कर ऐसा हो गया हो जिस पर टीके का प्रभाव घट गया हो।"
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रिचर्ड मार्सडेन ने ये भी कहा कि, "हमारा मानना है कि ये परीक्षण ब्रिटिश वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता साबित हो सकता है और यदि इस पद्धति को उपयुक्त सहयोग मिला तो हमारी दवा वैश्विक संकट को दूर करने में तीव्रता से सहायता करेगी।" जिस तरह से इस इनहेलर परीक्षण को किया जा रहा है, और ये पूरी तरह सफल रहता है तो इससे सिर्फ ब्रिटेन को ही नहीं पूरे विश्व को काफी मदद मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
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