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भारत में दवाओं के साइड इफेक्ट्स की रिपोर्टिंग में हुई बड़ी क्रांति, बना दुनिया के टॉप देशों में से एक
Wed, 17 Sep 2025 07:36 PM IST
शिखर बरनवाल
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Wed, 17 Sep 2025 07:36 PM IST
सार
- ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव रघुवंशी के अनुसार, भारत दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टिंग में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है।
- उन्होंने फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के दौरान कहा कि मरीजों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खुद इस रिपोर्टिंग में भाग लेना चाहिए ताकि दवाओं को और सुरक्षित बनाया जा सके।
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दवाओं का साइड एफेक्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Reporting of Side Effects of Drugs: दवाओं के साइड इफेक्ट्स की रिपोर्टिंग के मामले में भारत अब दुनिया के शीर्ष देशों में से एक बन गया है। यह बात ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई), डॉ. राजीव रघुवंशी ने हाल ही में राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के उद्घाटन समारोह में कही। यह सप्ताह 17 से 23 सितंबर तक 'आपकी सुरक्षा, बस एक क्लिक दूर: पीवीपीआई को रिपोर्ट करें' थीम के साथ मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता, डॉक्टर और शोधकर्ताओं को दवाओं के साइड इफेक्ट्स की ऑनलाइन रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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क्या है फार्माकोविजिलेंस और इसका महत्व?
फार्माकोविजिलेंस का मतलब है दवाओं से होने वाले बुरे प्रभावों पर नजर रखना और उनकी जानकारी इकट्ठा करना। डॉ. रघुवंशी ने बताया कि जब से देश में फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम शुरू हुआ है, तब से रिपोर्टिंग में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, 'रिपोर्टिंग की संख्या के मामले में हम दुनिया के शीर्ष योगदानकर्ताओं में से एक हैं।" यह दर्शाता है कि भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
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आम जनता की भागीदारी है सबसे जरूरी
डॉ. रघुवंशी ने इस बात पर जोर दिया कि अब तक ज्यादातर रिपोर्टें स्वास्थ्य पेशेवरों, जैसे कि डॉक्टर और नर्सों द्वारा ही दर्ज की जाती हैं। लेकिन इसका असली फायदा तभी मिलेगा, जब मरीज खुद भी आगे आकर अपनी रिपोर्ट दर्ज करें। उन्होंने कहा कि "मरीज जब खुद सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग में भाग लेंगे, तभी इसका सार्थक प्रभाव हासिल किया जा सकता है।' उन्होंने यह भी बताया कि हमारे पास विश्लेषण के लिए बहुत सारा डेटा उपलब्ध है, लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग करने की अभी भी कमी है।
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बदलाव और जागरूकता की जरूरत
डॉ. रघुवंशी ने कहा कि अब जब भारत में फार्माकोविजिलेंस का एक मजबूत आधार बन चुका है, तो इसके तरीकों को बदलने की जरूरत है। हमें तकनीक का बेहतर उपयोग करना चाहिए और लोगों को जागरूक करने के लिए नए तरीके अपनाने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, 'बेहतर परिणामों के लिए हमें संगठनों के भीतर डर की नहीं, बल्कि उत्सुकता का माहौल विकसित करना चाहिए।' इसका मतलब है कि लोगों को बिना किसी डर के साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'हमें बेहतर सोच के लिए प्रौद्योगिकी और नए तरीकों का स्मार्ट इंटीग्रेशन करना होगा।'
जनजागरूकता के लिए नई पहलें
इस अवसर पर, इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) ने कई नई पहलें शुरू की हैं ताकि लोगों तक जानकारी आसानी से पहुंच सके। जनता को जागरूक करने के लिए कुछ नई पहलें भी शुरू की गई हैं। इनमें पीवीपीआई पर बनी एक शॉर्ट फिल्म, लोगों को आसानी से समझाने के लिए कई भाषाओं में प्रकाशित एक कॉमिक, और क्यूआर कोड के माध्यम से एक नया ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म शामिल है। ये आम जनता को फार्माकोविजिलेंस के बारे में शिक्षित करने और उन्हें दवाओं के साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट करने के लिए प्रेरित करेंगी, जिससे भारत में दवाओं की सुरक्षा और भी मजबूत होगी।