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दुनिया में पहली बार, बिना किसी इलाज के अपने आप ठीक हुआ HIV का मरीज

Tue, 01 Sep 2020 10:47 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 01 Sep 2020 10:47 PM IST
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For the first time a person immune system fought HIV and won
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay/Amarujala

ये तो आप जानते ही होंगे कि एचआईवी का संक्रमण लाइलाज होता है यानी इस जानलेवा वायरस को शरीर से पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। हालांकि इलाज के द्वारा इसके प्रभाव को थोड़ा कम जरूर किया जा सकता है, लेकिन दुनिया में पहली बार एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को हैरान कर दिया है। दरअसल, एचआईवी से संक्रमित एक मरीज अपने आप ठीक हो गया है यानी उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ने इस वायरस को पूरी तरह से शरीर से खत्म कर दिया। यह वाकई हैरान करने वाली बात है, क्योंकि आमतौर पर जब किसी में एचआईवी का संक्रमण होता है तो वह अपनी प्राकृतिक प्रतिरक्षण क्षमता खो देता है। ऐसे में वह किसी अन्य वायरस के संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाता है यानी उसे कोई अन्य बीमारी आसानी से पकड़ लेती है, जिसकी वजह से उसका इलाज करना कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में उस मरीज को जिंदगीभर दवाइयों के सहारे ही जीना पड़ता है। 

For the first time a person immune system fought HIV and won
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

26 अगस्त को साइंस मैगजीन नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, जब अपने आप एचआईवी के ठीक होने का मामला सामने आया तो डॉक्टरों ने सबसे पहले उस व्यक्ति के शरीर में मौजूद 150 करोड़ कोशिकाओं की जांच की, लेकिन उसके शरीर में एचआईवी के सक्रिय वायरस उन्हें नहीं मिले। इस मरीज का नाम EC2 रखा गया था। 

For the first time a person immune system fought HIV and won
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इसी तरह एचआईवी से संक्रमित रहे एक अन्य मरीज EC1 के भी शरीर की 100 करोड़ कोशिकाओं की जांच की गई। हालांकि उसके शरीर में सिर्फ एक सक्रिय वायरस पाया गया, लेकिन वो भी आनुवांशिक रूप से निष्क्रिय है। इससे यह निष्कर्ष निकला कि एचआईवी से ठीक हुए दोनों मरीजों के शरीर का जेनेटिक्स ऐसा है कि वह एचआईवी वायरस को नष्ट कर दे रहा है। खास बात ये है कि इन दोनों ही मरीजों के शरीर में एचआईवी से होने वाले नुकसान भी नहीं देखे गए।  

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For the first time a person immune system fought HIV and won
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पूरी तरह से जांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने EC1 और EC2 दोनों को ही एलीट कंट्रोलर्स नाम दिया है। दरअसल, एलीट कंट्रोलर्स वैसे मरीजों को कहा जाता है, जिनके शरीर में एचआईवी वायरस है, लेकिन वह पूरी तरह से निष्क्रिय है या फिर इतनी कम मात्रा में है कि वह बिना किसी इलाज और दवा के खुद-ब-खुद ठीक हो सकता है।  

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For the first time a person immune system fought HIV and won
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हालांकि वैज्ञानिक ऐसा मान कर चल रहे हैं कि हो सकता है कि EC1 और EC2 के शरीर में एचआईवी का कमजोर वायरस हो। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जानने के लिए वैज्ञानिकों ने 64 एलीट कंट्रोलर्स मरीजों के शरीर में एचआईवी के संक्रमण का अध्ययन किया है, जिसमें यह पाया गया कि इनमें से 41 मरीज एंटीरेट्रोवायरल दवा का सेवन कर रहे थे, लेकिन EC2 ऐसा मरीज है, जिसने कोई दवा नहीं ली और उसके शरीर में एचआईवी वायरस पूरी तरह से निष्क्रिय है। 

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