कामयाबी: अब बस 15 मिनट में ही प्रोस्टेट कैंसर का चल जाएगा पता, तेज जांच से बच सकेंगी लाखों जिंदगियां
- वैज्ञानिकों ने एक 15 मिनट वाले कारगर प्रोस्टेट कैंसर स्कैन के बारे में जानकारी दी है, जिससे इस कैंसर आसानी से पता लगाना आसान हो सकता है।
- सबसे अच्छी बात ये है कि ये नया एमआरआई स्कैन, मौजूदा एमआरआई स्कैन से आधा समय लेता है और इसकी लागत भी आधी है।
विस्तार
Prostate Cancer: कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। पुरुषों में फेफड़े और मुंह के साथ प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस लेख में हम प्रोस्टेट कैंसर और इसके बढ़ते जोखिमों को समझने की कोशिश करेंगे।
साल 2022 में, दुनियाभर में इस कैंसर के लगभग 1.47 मिलियन (14 लाख) नए मामले सामने और करीब चार लाख लोगों की इससे मौत हो गई। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि यह संख्या 2040 तक दोगुनी हो सकती है। बढ़ती उम्र, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, फैमिल हिस्ट्री और कुछ प्रकार के पर्यावरणीय कारक इस कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
भारत में, प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला तीसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है और इसके मामलों में लगातार वृद्धि भी हो रही है। हाल ही में एक 85 वर्षीय व्यक्ति की नोएडा में रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से 437 ग्राम वजन वाले प्रोस्टेट को सफलतापूर्वक हटाया गया था, जो सामान्य आकार से लगभग दस गुना बड़ा था। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए डॉक्टर नियमित स्क्रीनिंग, स्वस्थ आहार और शारीरिक सक्रियता जैसे उपायों को अपनाने की सलाह देते हैं।
वैज्ञानिकों की टीम ने हाल के वर्षों में कई ऐसे खोज किए हैं जिससे प्रोस्टेट कैंसर का समय पर स्क्रीनिंग और इलाज पहले की तुलना में आसान हो गया है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक 15 मिनट वाले कारगर प्रोस्टेट कैंसर स्कैन के बारे में जानकारी दी है, जिससे इस कैंसर आसानी से पता लगाना और आसान हो सकता है।
कम लागत और कम समय में प्रोस्टेट कैंसर का चलेगा पता
विशेषज्ञों ने बताया कि इस एमआरआई स्कैन की मदद से लाखों लोगों में समय रहते इस कैंसर का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
- सबसे अच्छी बात ये है कि ये नया एमआरआई स्कैन, मौजूदा एमआरआई स्कैन से आधा समय लेता है और इसकी लागत भी आधी है।
- दूसरी खास बात ये है कि इसे परीक्षणों में रोग का निदान करने में उतना ही सटीक पाया गया है जितने कि अब तक के स्कैन थे।
ब्रिटिश शोधकर्ताओं का कहना है कि इसकी मदद से अब कम समय में अधिक लोगों की जांच की जा सकेगी और स्कैन के लिए मरीजों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम होगा।
समय पर रोग का निदान न हो पाना बड़ी चिंता
करीब एक दशक में इस कैंसर के लिए एमआरआई स्कैन की शुरुआत हुई थी जो प्रोस्टेट कैंसर के निदान के तरीके में पिछले 30 वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव रहा है। एमआरआई स्कैन में दिखाई देने वाली असामान्यताओं के आधार पर बायोप्सी ली जा सकती है जिससे कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक एमआरआई स्कैन के स्पष्ट लाभ के बावजूद, इंग्लैंड और वेल्स में प्रोस्टेट एमआरआई की जरूरत वाले केवल 62 प्रतिशत पुरुषों का ही 2019 में एमआरआई जांच हो पाया था।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इंग्लैंड स्थित यूसीएल सर्जरी एंड इंटरवेंशनल साइंस के प्रमुख शोधकर्ता और इस परीक्षण के मुख्य लेखक वीरू कासिविस्वनाथन कहते हैं, वर्तमान में प्रोस्टेट कैंसर के निदान के लिए दुनियाभर में हर साल लगभग 40 लाख एमआरआई स्कैन की आवश्यकता होती है। अगले 20 वर्षों में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में अनुमानित वृद्धि के साथ यह मांग तेजी से बढ़ने वाली है।
समय, लागत और कर्मचारियों की उपलब्धता, ये प्रमुख कारक हैं जिसके चलते लोग स्कैन नहीं करा पाते हैं। ये नई एमआरआई तकनीक ऐसे लोगों के लिए कारगर हो सकती है। अगर हम स्कैन आधे समय में, कम कर्मचारियों और कम लागत पर कर सकें, तो इससे हर उस व्यक्ति को लाभ मिल सकता है जिसमें कैंसर का खतरा है। इसके अलावा समय पर कैंसर का इलाज हो पाने से उसकी जान बचने की संभावना भी अधिक हो सकती है।
प्रोस्टेट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए दिशानिर्देश
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के प्रोस्टेट कैंसर फाउंडेशन ने प्रोस्टेट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए नैदानिक दिशानिर्देश जारी किए थे। नई गाइडलाइंस के तरत सभी पुरुषों को 40 वर्ष की आयु में एक 'बेसलाइन' पीएसए परीक्षण की सलाह दी गई है।
40 वर्ष की उम्र में प्रारंभिक परीक्षण की मदद से पीएसए डबलिंग टाइम का पता लगाने में मदद मिल सकती है, जो ये पता लगाने में मदद करता है कि अगले कितने महीनों में पीएसए का स्तर बढ़ सकता है? पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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