Heart Disease: बच्चों में बढ़ता हृदय रोगों का खतरा, डॉक्टर्स की सलाह इस उम्र से ही शुरू करा दें बीपी की जांच
- नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिड लाइफ हृदय रोगों की समस्या से बचे रहने के लिए जरूरी है कि नियमित रूप से बच्चों के भी ब्लड प्रेशर की जांच की जाती रहे।
- ब्लड प्रेशर बढ़ना एक साइलेंट किलर की तरह है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब 7 साल से अधिक उम्र के बच्चों के भी नियमित बीपी जांच की सलाह दे रहे हैं।
विस्तार
Heart Disease In Children: वैश्विक स्तर पर हाल के वर्षों में जिन बीमारियों के मामले सबसे तेजी से बढ़े हैं हृदय रोग उनमें से एक है। कुछ दशकों पहले तक हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं को बुजुर्गों में होने वाली बीमारी माना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। हाल के दिनों में आपने भी सोशल मीडिया पर अचानक हार्ट अटैक और इससे मौत के मामले खूब देखे-सुने होंगे।
डॉक्टर कहते हैं, आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत की उपेक्षा कर बैठते हैं। अनियमित खानपान, प्रोसेस्ड फूड्स, शारीरिक गतिविधियों में कमी, तनाव और नींद की कमी जैसी आदतों के कारण 20 से कम उम्र के लोगों में भी हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) और इसके कारण हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं बढ़ती हुई देखी जा रही हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ना एक साइलेंट किलर की तरह है, इसके जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब 7 साल से अधिक उम्र के बच्चों के भी नियमित ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहने की सलाह दे रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि आमतौर पर हम मान लेते हैं कि बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत नहीं होती है, पर बीते वर्षों में ये मिथ टूटी है, लिहाजा इसके लक्षणों को अनदेखा करना गंभीर स्वास्थ्य संकट को न्योता देना है।
(देश में हर तीसरी मौत का कारण हृदय रोग, रिपोर्ट में सामने आई अन्य बीमारियों की डरावनी तस्वीर)
बच्चों में बढ़ते हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के मामले
एक हालिया रिपोर्ट में शिकागो स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि मिड लाइफ हृदय रोगों की समस्या से बचे रहने के लिए जरूरी है कि नियमित रूप से बच्चों के भी ब्लड प्रेशर की जांच की जाती रहे।
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में भी हाइपरटेंशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जिन बच्चों में 7 साल की उम्र में उच्च रक्तचाप की दिक्कत थी उनमें 50 साल की उम्र तक हृदय रोगों से मृत्यु का जोखिम 50 प्रतिशत तक अधिक था। यानी अगर कम उम्र से ही ब्लड प्रेशर पर ध्यान दे लिया जाए तो ये भविष्य में हृदय संबंधित जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है।
बच्चों की नियमित रूप से रक्तचाप की जांच जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यूएस- ब्रिटेन सहित अधिकतर देशों में वर्तमान में नेशनल स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत बच्चों की नियमित रूप से रक्तचाप की जांच नहीं की जाती है, कारण- हम मानते ही नहीं हैं कि बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं।
हालांकि अब शोधकर्ताओं ने कहना है कि अध्ययनों के निष्कर्षों से पता चलता है कि बच्चों के रक्तचाप की नियमित जांच बहुत जरूरी हो गई है ताकि उन्हें शुरू से ही हृदय स्वास्थ्य की जानकारी मिल सके और इसे स्वस्थ रखने वाली आदतें विकसित करने में मदद मिल सके।
अध्ययन में क्या पता चला?
विशेषज्ञों की टीम ने एक लंबे समय से चल रहे अध्ययन के तहत सात साल की उम्र में रक्तचाप की जांच करवाने वाले 38,000 बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। करीब 54 वर्षों के फॉलोअप के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों का इस उम्र में रक्तचाप अधिक था, उनके 50 की उम्र तक हृदय रोग और इससे मृत्य का खतरा अधिक पाया गया।
नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय की प्रमुख लेखिका एलेक्सा फ्रीडमैन कहती हैं, हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि बचपन में उच्च रक्तचाप के मामले बढ़ रहे हैं और जो वयस्कावस्था में हृदय स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे को जन्म दे सकते हैं।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
डॉ फ्रीडमैन कहती हैं अध्ययन संबंधी हमारे परिणाम बताते हैं कि बचपन में रक्तचाप की जांच और बचपन से ही हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की आदतों पर ध्यान देते रहना जरूरी है। इससे पहले के निष्कर्षों में कहा जा रहा था 12 वर्ष की औसत आयु वाले बच्चों में रक्तचाप, 46-50 वर्ष की आयु तक हृदय संबंधी मृत्यु का जोखिम बढ़ा देता है। अब हमने 7 साल की उम्र वाले बच्चों में भी इस बढ़ते खतरे को नोटिस किया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी माता-पिता को अपने बच्चे के रक्तचाप की रीडिंग के बारे में जागरूक रहना महत्वपूर्ण है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के नैदानिक दिशानिर्देश तो तीन साल की उम्र से शुरू होने वाले वार्षिक जांच में भी रक्तचाप को शामिल करने की वकालत करते हैं।
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स्रोत
Hypertension (child)
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