Covid-19: कोरोना की कम होती रफ्तार पर नहीं टला खतरा, एक-दो नहीं इन 6 वैरिएंट्स को WHO मान रहा है चिंताजनक
डब्ल्यूएचओ के हालिया अपडेट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि मौजूदा समय में सिर्फ NB.1.8.1 ही नहीं बल्कि कोरोना के 6 वैरिएंट्स को वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग के रूप में रखा गया है। इससे संभावित खतरों को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम लगातार इसपर नजर बनाए हुए है।
विस्तार
Covid-19: कोरोनावायरस का संक्रमण और हर आठ-दस महीने में एक नई लहर, पिछले करीब 5 साल से ये क्रम लगातार जारी है। ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण हाल के दिनों में फिर से कई देशों में संक्रमण की एक नई लहर देखी गई। मई का महीना भारत के लिए भी कोरोना को लेकर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है।
22 मई से 15 जून के बीच यहां संक्रमण के एक्टिव मामले बढ़कर 7400 के करीब हो गए थे, हालांकि अब इसमें धीरे-धीरे कमी आ रही है। 22 जून (रविवार) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड डैशबोर्ड पर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक कोरोना के एक्टिव मामले अब घटकर 4754 रह गए हैं।
दुनिया के तमाम देशों में कोरोना की इस लहर के लिए मुख्यरूप से निंबस (Nimbus) और स्ट्राटस (Stratus) वैरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। एनबी.1.8.1 को अनौपचारिक रूप से “निंबस” उपनाम दिया गया है, वहीं एक्सएफजी को स्ट्राटस कहा जा रहा है।
मई महीने में कोरोना के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने NB.1.8.1 को वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग के रूप में वर्गीकृत कर दिया, इससे पहले इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में रखा गया था।
वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग का मतलब क्या है?
वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग का मतलब है कि अब वायरस के इस रूप को लेकर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देने और निगरानी की आवश्यकता है। वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के दौरान वायरस में हुए परिवर्तन और इसके प्रभाव को समझने की कोशिश की जाती है, इस वर्गीकरण का मतलब होता है कि वैरिएंट ज्यादा चिंताजनक नहीं है।
डब्ल्यूएचओ के हालिया अपडेट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि मौजूदा समय में सिर्फ NB.1.8.1 ही नहीं बल्कि कोरोना के 6 वैरिएंट्स को 'वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग' के रूप में रखा गया है। इससे संभावित खतरों को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम लगातार इसपर नजर बनाए हुए है।
6 वैरिएंट्स 'वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग' के रूप में वर्गीकृत
डब्ल्यूएचओ ने एक अपडेटस में 23 मई 2025 तक कोरोना के 6 वैरिएंट्स को वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग वर्गीकृत किया था।
ये 6 वैरिएंट्स KP.3, KP.3.1.1, LB.1, XEC, LP.8.1और NB.1.8.1 हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों की टीम ने इन वैरिएंट्स में कुछ अतिरिक्त म्यूटेशंस देखे हैं जो इसकी संक्रामकता का तेजी से बढ़ाने वाले हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि ये वैरिएंट किसी आबादी में तेजी से संक्रमण बढ़ाने का कारण बन सकते हैं जिसे लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
हर साल देखी जा सकती है एक हल्की लहर
कोरोना के जोखिमों को देखते हुए चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग में श्वसन चिकित्सा के प्रोफेसर डेविड हुई शू-चियोंग कहते हैं, वैश्विक आबादी में एंटीबॉडी के स्तर में गिरावट के कारण हर छह से नौ महीने में कोरोना का प्रकोप देखा जाता रहा है, ये आगे भी देखा जाता रह सकता है। इससे बचाव को लेकर हमें पहले से अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
कोरोना से सुरक्षित रहने के लिए उच्च जोखिम समूह (65 साल से अधिक उम्र, कोमोरबिडिटी के शिकार) वाले लोगों को सालाना डॉक्टर की सलाह के आधार पर कोविड-19 टीकाकरण जरूर कराना चाहिए।
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स्रोत
Currently circulating COVID-19 Variants under Monitoring
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