कोरोना वायरस की वैक्सीन का इंतजार पूरी दुनिया को है, क्योंकि फिलहाल यहीं एक रास्ता दिख रहा है जो इस खतरनाक वायरस से लोगों को बचा सकता है। रूस ने तो अपनी वैक्सीन 'स्पुतनिक-वी' को आम लोगों के लिए बाजार में उतार भी दिया है और अब अमेरिका से भी एक अच्छी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी फार्मा कंपनी 'फाइजर' की वैक्सीन अक्तूबर के आखिर तक उपलब्ध हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जानकारी बायोएनटेक कंपनी के सीईओ और को-फाउंडर उगुर साहिन ने एक निजी न्यूज चैनल से इंटरव्यू के दौरान दी है। इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने भी कुछ ऐसा ही अंदेशा जताया है कि फाइजर की वैक्सीन अक्तूबर तक आ सकती है।
2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल, इस वैक्सीन को फाइजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक ने मिलकर बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बायोएनटेक ने अपनी वैक्सीन पर विश्वास जताते हुए कहा है, 'हमारे पास एक सुरक्षित वैक्सीन है और हमें विश्वास है कि यह काम करेगा। हमें वैक्सीन लेने वालों में बार-बार बुखार का लक्षण देखने को नहीं मिला है। इसके अलावा सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण भी बहुत कम ही दिखे हैं।'
3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
फिलहाल इस वैक्सीन के तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है। जुलाई में ही फाइजर और बायोएनटेक दोनों कंपनियों ने एक साझा बयान जारी करते हुए बताया था कि वैक्सीन प्रोजेक्ट इंसानों पर परीक्षण के आखिरी चरण में पहुंच गई है और अगर ये परीक्षण सफल रहे, तो अक्तूबर महीने के अंत तक वो सरकारी मंजूरी के लिए आवेदन दे सकेंगे।
4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कंपनियों के मुताबिक, उनकी योजना साल 2020 के आखिर तक वैक्सीन की 10 करोड़ और साल 2021 के आखिर तक वैक्सीन की 1.3 अरब खुराक की आपूर्ति सुनिश्चित करने की है। अमेरिकी सरकार ने फाइजर के साथ 10 करोड़ खुराक खरीदने का समझौता कर रखा है। समझौते के तहत अगर जरूरत पड़ी तो वैक्सीन की 50 करोड़ खुराक की आपूर्ति और की जाएगी।
5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
फायर्सफार्मा में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाइजर और बायोएनटेक का कहना था कि वो अपनी कोरोना वैक्सीन अमेरिकी सरकार को 19.50 डॉलर प्रति डोज यानी करीब 1,500 रुपये के हिसाब से बेचेंगे। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों को इस वैक्सीन के दो शुरुआती डोज और एक बूस्टर डोज की जरूरत होगी और इसके लिए उन्हें 40 डॉलर यानी करीब 3,000 रुपये तक देने पड़ सकते हैं। हालांकि अगर टीकाकरण अभियान चलाया गया, तो उसके तहत इस वैक्सीन की कीमत करीब 1,500 रुपये तक हो सकती है।