महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है। इससे हर साल 3.50 लाख से अधिक महिलाओं की मौत हो जाती है। हर दो मिनट में ये एक महिला की इस जान ले रहा है। हालांकि अच्छी बात ये है कि सर्वाइकल कैंसर को लेकर पहले से ही अलर्ट हो जाएं तो इससे काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। इससे बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन का कारगर माना जाता रहा है।
सर्वाइकल कैंसर: कैंसर से बचाने वाली इस कारगर वैक्सीन के बारे में ये बातें जानते हैं आप? महिलाएं दें ध्यान
HPV Vaccine: एचपीवी वैक्सीन ह्यूमन पैपिलोमावायरस से बचाव करती है, जो सर्वाइकल कैंसर समेत कुछ अन्य कैंसर का कारण बन सकते हैं। किशोरावस्था में टीका लगवाना फायदेमंद है। वैक्सीनेशन के बाद भी जरूरी कैंसर स्क्रीनिंग कराते रहें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सही जानकारी होने से वैक्सीनेशन को लेकर डर और भ्रम दूर किए जा सकते हैं। आइए इस वैक्सीन के बारे में कुछ जरूरी बातें जान लेते हैं।
पहले जानिए एचपीवी वैक्सीन क्या है और क्यों जरूरी है?
एचपीवी एक ऐसा वायरस है जो त्वचा के करीबी संपर्क, खासकर यौन संपर्क के दौरान फैल सकता है। इसके कुछ प्रकार सर्वाइकल कैंसर के अलावा गुदा, लिंग और गले के कैंसर को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- एचपीवी वैक्सीन वायरस के उन प्रकारों से बचाव करती है, जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
- इस वैक्सीन से आप कैंसर से बचाव कर सकती हैं।
- एचपीवी वैक्सीन मौजूदा एचपीवी संक्रमण को ठीक नहीं करती, बल्कि नए संक्रमणों से बचाव करती है।
- यह टीका संक्रमण के संपर्क में आने से पहले लगवाने पर सबसे ज्यादा प्रभावी होता है।
किस उम्र में लगवानी चाहिए वैक्सीन?
एचपीवी वैक्सीन आमतौर पर किशोरावस्था में लगवाने की सलाह दी जाती है। कई अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों में 9 साल की उम्र से टीका शुरू करने और 11-12 साल की उम्र में नियमित वैक्सीनेशन की सिफारिश की गई है। लड़कियों के साथ लड़कों को भी इससे फायदा मिल सकता है।
- भारत में 28 फरवरी 2026 को 14 साल की लड़कियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किए जाने की घोषणा की गई थी। आप अपने डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लगवा सकती हैं।
क्या एचपीवी वैक्सीन सुरक्षित है?
- एचपीवी वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर अध्ययन हुए हैं। आमतौर पर इसके साइड इफेक्ट हल्के होते हैं। कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह दर्द, लालिमा या सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भावस्था में आमतौर पर वैक्सीन न लगाने की सलाह दी जाती है, इस बारे में डॉक्टर की सलाह ले लें। टीका लगने के बाद भी महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
- सर्वाइकल कैंसर की शुरुआत में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन बीमारी बढ़ने पर पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, यौन संबंधों के बाद खून आने, मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग और असामान्य योनि स्राव जैसे लक्षण दिख सकते हैं। वैसे तो ऐसे लक्षण होने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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