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Coronavirus: वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, तैयार किया ऐसा इनहेलर, जो कोरोना वायरस को नाक में ही रोक लेता है
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 17 Aug 2020 01:45 PM IST
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कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए पूरी दुनिया में वैक्सीन पर काम चल रहा है। इसके अलावा दवाओं या अन्य तरीकों की भी लगातार खोज की जा रही हैं, जो वायरस के खात्मे में मददगार हो सकें। इस क्रम में अमेरिका ने एक ऐसा एंटी-कोरोना स्प्रे तैयार किया है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि इनहेलर के जरिए उस स्प्रे का इस्तेमाल करने पर वह कोरोना वायरस को नाक में ही रोक लेता है। वह वायरस को शरीर में प्रवेश नहीं करने देता। इसे विकसित करने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो यह इनहेलर पीपीई किट से भी अधिक कारगर और प्रभावी है। आइए जानते हैं वैज्ञानिकों ने इस इनहेलर को कैसे तैयार किया है और यह कैसे वायरस को नाक में ही रोक लेता है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एंटी-कोरोना स्प्रे का निर्माण अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। उनका कहना है कि इसे बनाने में कोरोना एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले लैब में एंटीबॉडीज से नैनोबॉडीज का निर्माण किया गया और इसे जेनेटिकली मॉडिफाई किया गया, ताकि यह कोरोना वायरस को आगे बढ़ने से रोक दे।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि लामा और ऊंट जैसे जानवरों में पाई जानेवाली एंटीबॉडीज से नैनोबॉडीज को विकसित किया गया है और इसी नैनोबॉडीज का इस्तेमाल कोरोना को रोकने वाला इनहेलर बनाने में किया गया है। आपको बता दें कि ये एंटीबॉडीज शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना तक बढ़ा देती है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, मुख्य रूप से इस एंटी-कोरोना स्प्रे का प्रभाव प्रोटीन से निर्मित कोरोना वायरस की बाहरी परत पर होता है। दरअसल, यह वायरस की ऊपरी प्रोटीन परत को नाक में ही ब्लॉक कर देता है, जिससे यह वायरस इंसान के गले से होते हुए शरीर में नहीं पहुंच पाता।
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अब शोधकर्ता इस एंटी-कोरोना स्प्रे का बड़े पैमाने पर ह्यूमन ट्रायल की तैयारी करने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यह ट्रायल में सफल रहता है तो यह कोरोना महामारी को रोकने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका साबित हो सकता है।
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