दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक इस वायरस से दो करोड़ 86 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि नौ लाख 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अगर भारत की बात करें तो यहां पिछले 24 घंटों में 97 हजार से अधिक संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अब यहां संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 46 लाख 59 हजार से अधिक हो गई है। हालांकि राहत की बात ये है कि इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। यहां अब तक 36 लाख 24 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं। इस वायरस के संक्रमण को लेकर लगातार रिसर्च चल रही है कि यह किस हद तक शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है या पहुंचा रहा है। हाल ही में किए गए एक शोध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आइए जानते हैं इसके बारे में...
कोरोना वायरस फेफड़ों को कैसे और कितना पहुंचाता है नुकसान? सिगरेट पीने वाले हो जाएं सावधान
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर एक बार कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो वह उसे काफी नुकसान पहुंचाता है। वैसे तो यह पहले से सिद्ध हो चुका है कि सिगरेट पीने से फेफड़ों को क्षति पहुंचती है, लेकिन अब ताजा शोध में यह खुलासा हुआ है कि किसी व्यक्ति के फेफड़ों को लगातार 25 साल तक धूम्रपान करने यानी सिगरेट पीने से जितना नुकसान नहीं होता, उतना तो कोरोना वायरस महज एक महीने में नुकसान पहुंचा सकता है।
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कोरोना के संक्रमण से एक बार ठीक होने के बाद सबकुछ ठीक हो गया, जबकि ऐसा नहीं है। ठीक हुए लोगों के फेफड़ों को कोरोना वायरस के कारण स्थायी क्षति भी पहुंच सकती है। यह धूम्रपान करने वााले लोगों के लिए और भी जानलेवा साबित हो सकता है।
कई रिपोर्ट्स में ऐसा खुलासा हुआ है कि कोरोना वायरस के हमले के कारण ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है और फेफड़ों में सफेद दाग पड़ जाते हैं। सांस लेने में कठिनाई की वजह से कई लोगों को अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ रहा है। अब तक हुए रिसर्च से यह बात तो साबित नहीं हुई है कि कोरोना से ठीक होने के बाद क्षतिग्रस्त फेफड़ों की हालत कब तक ठीक हो पाती है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इसमें छह महीने भी लग सकते हैं और एक साल भी।
सांस लेने में क्यों होती है दिक्कत?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों तक पहुंचता है तो वह फेफड़ों को छोटे-छोटे एयरसैक यानी वायुकोष बना देता है। इन्हीं वायुकोष में जब पानी जमने लगता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है, इंसान लंबी सांस नहीं ले पाता। इस स्थिति में मरीज को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।