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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: विशेषज्ञों से जानिए कोरोना के कारण उत्पन्न मानसिक समस्याओं को कैसे दूर करें?
Thu, 03 Jun 2021 08:05 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Thu, 03 Jun 2021 08:05 PM IST
सार
- कोरोना के कारण तनाव और अवसाद के मामलों में बढ़ोतरी
- ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की भी समस्या देखी जा रही है।
- साइकोथेरपी से किया जा सकता है इलाज
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कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर असर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
Medically Reviewed by-
डॉ अमन किशोर
मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर
डॉ बिलाल
चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में हर तरफ नकारात्मकता का माहौल बना हुआ है। रोजाना संक्रमण के मामलों में फिलहाल थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन हालात अभी बहुत ज्यादा सुधरे नहीं हैं। कोविड-19 के कारण हर तरफ बीमारी और लॉकडाउन की स्थिति ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को काफी प्रभावित किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर न सिर्फ इसलिए गंभीर रही है क्योंकि इस बार लोग तेजी से संक्रमित हुए, बल्कि ऐसी विकट समस्या तब वापस लौटी जब ऐसा लगने लगा था कि अब सबकुछ ठीक हो रहा है। इस तरह की परिस्थितियों ने लोगों को कई तरह से प्रभावित किया है जिसका असर स्पष्टतौर पर लोगों में तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे समय में लोगों को अपने शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर गुरुवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इसी बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर के डॉ अमन किशोर और उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ बिलाल ने सभी सवालों के जवाब दिए।
कोरोना का मानसिक स्वास्थ्य पर असर
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के डॉ बिलाल बताते हैं कि कोरोना के चलते देश को दो बार लॉकडाउन की स्थिति में जाना पड़ा। इससे संक्रमण को रोकने में जरूर सफलता मिली लेकिन मानसिक और आर्थिक रूप से लोगों को इसने बुरी तरह से प्रभावित किया। घरों में लंबे समय तक बंद रहना, अपने प्रियजनों से न मिल पाने का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्पष्ट देखा जा रहा है। कई लोगों में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की भी समस्या देखने को मिल रही है, जिसमें लोगों को हमेशा लगता है कि कहीं उनके हाथ गंदे तो नहीं हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है?
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डॉ अमन किशोर
मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर
डॉ बिलाल
चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में हर तरफ नकारात्मकता का माहौल बना हुआ है। रोजाना संक्रमण के मामलों में फिलहाल थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन हालात अभी बहुत ज्यादा सुधरे नहीं हैं। कोविड-19 के कारण हर तरफ बीमारी और लॉकडाउन की स्थिति ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को काफी प्रभावित किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर न सिर्फ इसलिए गंभीर रही है क्योंकि इस बार लोग तेजी से संक्रमित हुए, बल्कि ऐसी विकट समस्या तब वापस लौटी जब ऐसा लगने लगा था कि अब सबकुछ ठीक हो रहा है। इस तरह की परिस्थितियों ने लोगों को कई तरह से प्रभावित किया है जिसका असर स्पष्टतौर पर लोगों में तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे समय में लोगों को अपने शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर गुरुवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इसी बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर के डॉ अमन किशोर और उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ बिलाल ने सभी सवालों के जवाब दिए।
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कोरोना का मानसिक स्वास्थ्य पर असर
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के डॉ बिलाल बताते हैं कि कोरोना के चलते देश को दो बार लॉकडाउन की स्थिति में जाना पड़ा। इससे संक्रमण को रोकने में जरूर सफलता मिली लेकिन मानसिक और आर्थिक रूप से लोगों को इसने बुरी तरह से प्रभावित किया। घरों में लंबे समय तक बंद रहना, अपने प्रियजनों से न मिल पाने का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्पष्ट देखा जा रहा है। कई लोगों में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की भी समस्या देखने को मिल रही है, जिसमें लोगों को हमेशा लगता है कि कहीं उनके हाथ गंदे तो नहीं हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है?
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कोविड के कारण तनाव औप घबराहट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
तनाव और अवसाद के मामले
डॉ अमन किशोर बताते हैं कि कोरोना के कारण लोगों में तनाव और अवसाद के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई ऐसे लोग भी इलाज के लिए आ रहे हैं जिनको पहले कभी मानसिक बीमारी नहीं थी लेकिन कोरोना ने इस तरह की समस्याओं को बढ़ा दिया है। लॉकडाउन के दौरान मिल रही मरने और लोगों की बदहाली की खबरों ने भी मानसिक सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कई मामलों में देखा गया कि परिवार के तीन-चार लोग कोरोना से संक्रमित थे, जिसमें से एक की मौत हो गई। यह दूसरे लोगों के लिए स्वाभाविक रूप से गहरा सदमा बनकर उभरा है।
कैसे पा सकते हैं इन समस्याओं से छुटकारा
डॉ बिलाल कहते हैं कि कोरोना ने सोशल स्टिगमा को भी जन्म दे दिया है। यदि किसी को भी लगातार अपने व्यवहार में बदलाव, तनाव, अवसाद या बेचैनी महसूस होती है तो उसे किसी मनोरोग विशेषज्ञ से संपर्क जरूर करना चाहिए। डॉ अमन बताते हैं कि ऐसे रोगियों का इलाज हो सकता है। बीमारी की शुरुआती स्थितियों में साइकोथेरपी और गंभीर स्थितियों में रोगी को दवाइयां दी जा सकती हैं।
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नोट: यह लेख मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर के डॉ अमन किशोर और उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ बिलाल से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉ अमन किशोर बताते हैं कि कोरोना के कारण लोगों में तनाव और अवसाद के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई ऐसे लोग भी इलाज के लिए आ रहे हैं जिनको पहले कभी मानसिक बीमारी नहीं थी लेकिन कोरोना ने इस तरह की समस्याओं को बढ़ा दिया है। लॉकडाउन के दौरान मिल रही मरने और लोगों की बदहाली की खबरों ने भी मानसिक सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कई मामलों में देखा गया कि परिवार के तीन-चार लोग कोरोना से संक्रमित थे, जिसमें से एक की मौत हो गई। यह दूसरे लोगों के लिए स्वाभाविक रूप से गहरा सदमा बनकर उभरा है।
कैसे पा सकते हैं इन समस्याओं से छुटकारा
डॉ बिलाल कहते हैं कि कोरोना ने सोशल स्टिगमा को भी जन्म दे दिया है। यदि किसी को भी लगातार अपने व्यवहार में बदलाव, तनाव, अवसाद या बेचैनी महसूस होती है तो उसे किसी मनोरोग विशेषज्ञ से संपर्क जरूर करना चाहिए। डॉ अमन बताते हैं कि ऐसे रोगियों का इलाज हो सकता है। बीमारी की शुरुआती स्थितियों में साइकोथेरपी और गंभीर स्थितियों में रोगी को दवाइयां दी जा सकती हैं।
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नोट: यह लेख मानसिक आरोग्यशाला, ग्वालियर के डॉ अमन किशोर और उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ बिलाल से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।