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महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में बनती हैं एंटीबॉडीज, बेहिचक दान कर सकते हैं प्लाज्मा
Sat, 27 Jun 2020 06:06 AM IST
योगेश साहू
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 27 Jun 2020 06:06 AM IST
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प्लाज्मा थेरेपी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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कोरोना की चपेट में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक आए और मौतें भी हुईं। अब एक अध्ययन में पता चला है कि संक्रमण के बाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों में एंटीबॉडीज ज्यादा बनती हैं। प्लाज्मा थैरेपी का असर पता करने के लिए एक महीने तक चले अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि 43 फीसदी पुरुष जिन्होंने प्लाज्मा दान किया उनमें एंटीबॉडीज की मात्रा ज्यादा थी।
महिलाओं में ये आंकड़ा सिर्फ 23 फीसदी था। ब्रिटेन के एनएचएस सेवा से जुड़े पैथोलॉजिस्ट प्रो. डेविड रॉबटर्स का कहना है कि संक्रमण की चपेट में आ चुके लोगों को प्लाज्मा दान करने में कोई हिचक नहीं करनी चाहिए। इससे किसी की जान बच सकती है।
खासतौर पर पुरुषों को जिनमें एंटीबॉडीज का स्तर ज्यादा है। वे बताते हैं कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सफेद रक्त कोशिकाओं की मदद से पहले वायरस से लड़ती है। अगर शरीर में वायरस की मात्रा बढ़ती है, तो इम्युनिटी को और अधिक एंटीबॉडीज की जरूरत होती है जिससे वो वायरस को नियंत्रित या खत्म कर सके।
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गंभीर मरीजों को देते हैं एंटीबॉडीज
कोरोना की चपेट में आए उन मरीजों को एंटीबॉडीज या प्लाज्मा थैरेपी देते हैं जिनका शरीर एंटीबॉडीज नहीं बना पाता है। प्लाज्मा डोनेट करने में 45 मिनट का समय लगता है। रक्त को मशीन के जरिए फिल्टर किया जाता है और प्लाज्मा को अलग करते हैं जिसे वैज्ञानिक भाषा में प्लाज्माफेरेसिस कहते हैं। मरीज के ठीक होने के 28 दिन बाद प्लामा डोनेशन होता है, क्योंकि इतने समय में प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज बनने की संभावना रहती है।
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महिलाओं में ये आंकड़ा सिर्फ 23 फीसदी था। ब्रिटेन के एनएचएस सेवा से जुड़े पैथोलॉजिस्ट प्रो. डेविड रॉबटर्स का कहना है कि संक्रमण की चपेट में आ चुके लोगों को प्लाज्मा दान करने में कोई हिचक नहीं करनी चाहिए। इससे किसी की जान बच सकती है।
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खासतौर पर पुरुषों को जिनमें एंटीबॉडीज का स्तर ज्यादा है। वे बताते हैं कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सफेद रक्त कोशिकाओं की मदद से पहले वायरस से लड़ती है। अगर शरीर में वायरस की मात्रा बढ़ती है, तो इम्युनिटी को और अधिक एंटीबॉडीज की जरूरत होती है जिससे वो वायरस को नियंत्रित या खत्म कर सके।
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गंभीर मरीजों को देते हैं एंटीबॉडीज
कोरोना की चपेट में आए उन मरीजों को एंटीबॉडीज या प्लाज्मा थैरेपी देते हैं जिनका शरीर एंटीबॉडीज नहीं बना पाता है। प्लाज्मा डोनेट करने में 45 मिनट का समय लगता है। रक्त को मशीन के जरिए फिल्टर किया जाता है और प्लाज्मा को अलग करते हैं जिसे वैज्ञानिक भाषा में प्लाज्माफेरेसिस कहते हैं। मरीज के ठीक होने के 28 दिन बाद प्लामा डोनेशन होता है, क्योंकि इतने समय में प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज बनने की संभावना रहती है।