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आखिर क्यों लगाई आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की कोरोना वाली दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक?

Wed, 24 Jun 2020 09:18 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश जोशी Updated Wed, 24 Jun 2020 09:18 AM IST
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ayush ministry stops patanjali coronavirus medicine advertisement centre tells patanjali to stop advertising covid 19 therapy prove claims scientifically first
पतंजलि ने मंगलवार को 'कोरोनिल टैबलेट' और 'श्वासारि वटी' नाम की दो दवाएं लांच की - फोटो : अमर उजाला

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की ओर से कोरोना की दवा खोज लेने के दावों को लेकर मीडिया में छपी रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि कथित वैज्ञानिक अध्ययन के दावों की सच्चाई और विवरण के बारे में मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं है।

पतंजलि ने मंगलवार को 'कोरोनिल टैबलेट' और 'श्वासारि वटी' नाम की दो दवाएं लांच की, जिनके बारे में कंपनी ने दावा किया है कि ये कोविड-19 की बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज है।

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आयुष मंत्रालय ने कोरोना की दवा खोज लेने के दावों को लेकर मीडिया में छपी रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है - फोटो : अमर उजाला

मंत्रालय के बयान के मुताबिक पतंजलि को इस बारे में सूचित कर दिया गया है कि दवा के इस तरह के विज्ञापनों जिसमें आयुर्वेदिक दवा भी शामिल हैं, वो ड्रग एंड मैजिक रिमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन ) कानून, 1954 और कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों के अंतर्गत आता है।

मंत्रालय ने 21 अप्रैल, 2020 को एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें ये बताया गया था कि आयुष मंत्रालय की देखरेख में कोविड-19 को लेकर शोध अध्ययन कैसे किया जाएगा।

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आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लि मिटेड से पूछा है कि दवा को लेकर अध्ययन कहां हुआ- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से दवा के नाम और उसमें इस्तेमाल होने वाले घटकों का विवरण पूछा है। साथ ही यह भी पूछा है कि दवा को लेकर अध्ययन कहां या किस अस्पताल में हुआ है, क्या प्रोटोकॉल पालन किया गया है।

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मंत्रालय ने पूछा है कि सैंपल साइज क्या था- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मंत्रालय ने ये भी पूछा है कि सैंपल साइज क्या था, इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी क्लियरेंस मिली है या नहीं, सीटीआरआई रजिस्ट्रेशन और अध्ययन से जुड़ा डेटा कहां है।

मंत्रालय ने साफ कहा है कि जब तक इन तमाम मामलों की जांच नहीं हो जाती है, इस दवा से जुड़े दावों के बारे में विज्ञापनों पर रोक लगी रहेगी।

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मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के लाइसेंसिंग प्राधिकरण से दवा की लाइसेंस की कॉपी मांगी है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

इसके साथ ही मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के लाइसेंसिंग प्राधिकरण से दवा की लाइसेंस की कॉपी मांगी है और प्रोडक्ट के मंजूर किए जाने का ब्यौरा भी मांगा है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक प्रोफेसर बलराम भार्गव ने बीबीसी से बातचीत में पतंजलि द्वारा विकसित दवा के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया है।

उनसे पूछा गया था कि "क्या कोरोनिल नाम की इस दवा को कोविड-19 के मरीजों के इलाज में कारगर कहना सही होगा?' उन्होंने कहा, "मैं ऐसी किसी दवा पर टिप्पणी करना नहीं चाहूंगा। आईसीएमआर इस दवा से संबंधित किसी भी प्रयास में शामिल नहीं रहा।"

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