आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की ओर से कोरोना की दवा खोज लेने के दावों को लेकर मीडिया में छपी रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि कथित वैज्ञानिक अध्ययन के दावों की सच्चाई और विवरण के बारे में मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं है।
आखिर क्यों लगाई आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की कोरोना वाली दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक?
मंत्रालय के बयान के मुताबिक पतंजलि को इस बारे में सूचित कर दिया गया है कि दवा के इस तरह के विज्ञापनों जिसमें आयुर्वेदिक दवा भी शामिल हैं, वो ड्रग एंड मैजिक रिमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन ) कानून, 1954 और कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों के अंतर्गत आता है।
मंत्रालय ने 21 अप्रैल, 2020 को एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें ये बताया गया था कि आयुष मंत्रालय की देखरेख में कोविड-19 को लेकर शोध अध्ययन कैसे किया जाएगा।
आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से दवा के नाम और उसमें इस्तेमाल होने वाले घटकों का विवरण पूछा है। साथ ही यह भी पूछा है कि दवा को लेकर अध्ययन कहां या किस अस्पताल में हुआ है, क्या प्रोटोकॉल पालन किया गया है।
मंत्रालय ने ये भी पूछा है कि सैंपल साइज क्या था, इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी क्लियरेंस मिली है या नहीं, सीटीआरआई रजिस्ट्रेशन और अध्ययन से जुड़ा डेटा कहां है।
मंत्रालय ने साफ कहा है कि जब तक इन तमाम मामलों की जांच नहीं हो जाती है, इस दवा से जुड़े दावों के बारे में विज्ञापनों पर रोक लगी रहेगी।
इसके साथ ही मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के लाइसेंसिंग प्राधिकरण से दवा की लाइसेंस की कॉपी मांगी है और प्रोडक्ट के मंजूर किए जाने का ब्यौरा भी मांगा है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक प्रोफेसर बलराम भार्गव ने बीबीसी से बातचीत में पतंजलि द्वारा विकसित दवा के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया है।
उनसे पूछा गया था कि "क्या कोरोनिल नाम की इस दवा को कोविड-19 के मरीजों के इलाज में कारगर कहना सही होगा?' उन्होंने कहा, "मैं ऐसी किसी दवा पर टिप्पणी करना नहीं चाहूंगा। आईसीएमआर इस दवा से संबंधित किसी भी प्रयास में शामिल नहीं रहा।"