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Amar Ujala Samwad: अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे डॉ अभय बंग, करेंगे जन-जन की सेहत पर बात
Mon, 09 Jun 2025 05:35 PM IST
शिवानी अवस्थी
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Mon, 09 Jun 2025 05:35 PM IST
सार
Amar Ujala Samwad डॉ. अभय बंग सामुदायिक स्वास्थ्य शोधकर्ता हैं, जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में काम कर रहे हैं। उन्होंने शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से पहल और कार्यक्रम विकसित किए हैं।
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डाॅ. अभय बंग
- फोटो : amar ujala graphics
विस्तार
Amar Ujala Samwad : अमर उजाला उत्तराखंड संवाद-2025 का आगाज 10 जून को हो रहा है। इस कार्यक्रम में सिनेमा, खेल और अध्यात्म का संगम देखने को मिलेगा। हरिद्वार रोड स्थित होटल सेफर्ट सरोवर प्रीमियर में दिनभर चलने वाले कार्यक्रम में राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर अलग-अलग सत्र होंगे। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राजनाथ सिंह समेत कई राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े दिग्गजों को सुनने को मिलेगा। वहीं अभिनेता सुनील शेट्टी सिनेमा पर, स्वामी कैलाशानंद गिरी अध्यात्म पर बात करेंगे। जन-जन की सेहत पर बात करने के लिए डाॅ अभय बंग संवाद पर मंच पर पहुंच रहे हैं।
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इन सभी दिग्गजों को अगर आप भी सुनना और देखना चाहते हैं तो क्यूआर कोड स्कैन करके अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य और शिक्षा पर डॉ. अभय बंग करेंगे चर्चा
डॉ. अभय बंग सामुदायिक स्वास्थ्य शोधकर्ता हैं, जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में काम कर रहे हैं। उन्होंने शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से पहल और कार्यक्रम विकसित किए हैं। उनके प्रयासों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने भी सराहा है। अभय ने सोसाइटी फॉर एजुकेशन, एक्शन, एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ (सर्च) की स्थापना की, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में काम करती है। अमर उजाला संवाद मंच से वह अपने अनुभवों को साझा करेंगे और ग्राणीण स्वास्थ्य और इसमें शिक्षा की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
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Amar Ujala Samwad: जिनका पूरे देश में मान-सम्मान, 10 जून को उत्तराखंड संवाद में आपसे मिलने आएंगे
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महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित
महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से सम्मानित डॉ. बंग को लखनऊ में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान से मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने शिशु की मौत के 18 संभावित कारणों की पहचान की, जिन में गरीबी, डायरिया, संक्रमण, निमोनिया या अस्पताल की कमी शामिल है। उन्होंने विश्व स्तरीय शोध भी किया।
शिशु स्वास्थ्य पर कार्य कर रहें डाॅ. बंग
पिछले 30 वर्षों से वह और उनकी पत्नी डॉ. रानी बंग, महाराष्ट्र के आदिवासी जिले गढ़चिरौली में रहते और काम करते रहे हैं। बच्चों में निमोनिया और घर पर नवजात शिशु की देखभाल (एचबीएनसी) पर डॉ. बंग के काम ने वैश्विक नीति को आकार दिया है, जिसमें एचबीएनसी ने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर विस्तार किया है। वे भारत सरकार के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समूह (2011), आदिवासी लोगों पर उच्च स्तरीय समिति (2014) के सदस्य रहे हैं।