Pm Modi: मोटापा क्यों है सेहत के लिए इतना खतरनाक? लाल किले से पीएम ने की ये अपील; पहले भी करते रहे हैं सावधान
- 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से देश को अपने संबोधन में एक बार फिर से प्रधानमंत्री ने मोटापे की समस्या को लेकर चिंता जताई।
- पीएम ने अपील की है कि जब भी खाने का तेल घर में लाएं तो पहले की तुलना में ये 10% कम ही लाएं। ये मोटापे के खतरे को कम करने में आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
विस्तार
Pm Modi On Obesity: स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बढ़ती गंभीर चुनौतियों में मोटापा को सबसे प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। भारत में भी मोटापा एक बढ़ती हुई जन स्वास्थ्य चिंता का विषय है, जहां सभी आयु वर्गों में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के अनुसार, 24% महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। इसके अलावा, बचपन में मोटापे में भी चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है।
देश में मोटापे की इस बढ़ती समस्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार चिंता जताते रहे हैं। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को अपने संबोधन में एक बार फिर से प्रधानमंत्री ने मोटापे की समस्या को लेकर चिंता जताई।
पीएम मोदी ने कहा, जब मैं फिटनेस की बात करता हूं तो इस संबंध में एक बड़ी चिंता है जो एक बार फिर से मैं आप सभी के सामने रखना चाहता हूं- वो है मोटापा। सभी लोगों को इस विषय पर सावधान हो जाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि आने वाले वर्षों में हर तीसरा व्यक्ति मोटापे का शिकार हो सकता है। हमें इससे बचाव को लेकर सावधानी बरतनी होगी।
खाने के तेल में 10% कटौती की सलाह
प्रधानमंत्री ने कहा, मोटापे से बचने के लिए कई तरह के प्रयास जरूरी है, एक छोटा सा सुझाव इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए सभी परिवार ये तय करे कि जब भी खाने का तेल घर में लाएं तो पहले की तुलना में ये 10% कम ही लाएं। ये मोटापे के खतरे को कम करने में आपके लिए महत्वपूर्ण निभा सकती है।
ये पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने मोटापे की समस्या और इससे निपटने को लेकर चिंता जताई है। इससे पहले इसी साल फरवरी में मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में भी पीएम मोदी ने तेल में कटौती करने और मोटापे को कम करने को लेकर लोगों से अपील की थी।
क्यों मोटापे को माना जाता है गंभीर खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापा सिर्फ शरीर का बढ़ा हुआ वजन ही नहीं है, यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बढ़ता एक गंभीर खतरा है। इसे एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम माना जाता है क्योंकि यह कई गंभीर रोगों की जड़ है। डॉक्टर बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) और कमर के आकार से मोटापे का आकलन करते हैं। पेट और कमर की चर्बी को सबसे खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह अंदरूनी अंगों के कामकाज को प्रभावित करती है।
अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है। इससे शरीर में इंसुलिन का असर कम होता है, ब्लड शुगर बढ़ता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है। इसके अलावा मोटापा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का संतुलन बिगाड़कर दिल की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देती है।
जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ये रक्त में वसा जमा होकर धमनियों को संकरा करती है (एथेरोस्क्लेरोसिस) जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। विशेषज्ञों ने बताया कि शरीर के वजन को 5-10% घटाकर भी ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
मोटापा से कैंसर का भी खतरा
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापा 13 तरह के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। इनमें ब्रेस्ट, लिवर, कोलन, किडनी, पैनक्रियाज, ओवरी, थायरॉइड और पेट का कैंसर प्रमुख हैं। महिला हों या पुरुष, सभी इसका शिकार हो सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि आप कम उम्र से ही अपने वजन को कंट्रोल में रखने के लिए उपाय करते रहें।
कई अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा और कैंसर के जोखिम के बीच स्पष्ट संबंध है। यह मुख्य रूप से विसरल फैट (आंत या पेट की चर्बी) और इसके कारण होने वाली सूजन के कारण होता है।
एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर में प्रोफेसर करेन बेसन-एंग्क्विस्ट कहती हैं, अत्यधिक विसरल फैट की स्थिति आपके शरीर में होने वाली कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। इसमें यह भी शामिल है कि आपका शरीर इंसुलिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का प्रबंधन कैसे करता है। इन स्थितियों में कोशिकाओं के विभाजन पर भी असर होता है जिसके कारण कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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