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कोरोना वायरस से बदल सकती है हाथ मिलाने और गले मिलने की आदत
Fri, 03 Apr 2020 06:47 AM IST
योगेश साहू
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Fri, 03 Apr 2020 06:47 AM IST
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कोरोना अभिवादन की परंपरा बदल सकता है। पश्चिमी देशों में अब लोग हाथ मिलाने और गले मिलने की परंपरा से परहेज करने लगे हैं। समाज विज्ञानियों का मानना है कि वायरस का प्रभाव जितने समय तक रहेगा उतना ही इस पर खतरा अधिक होगा।
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संभव है कि वायरस के खत्म होने के बाद मनुष्यों का स्वभाव और उसकी सामाजिक परिस्थिति भी बदल जाए। इसके साथ ही कुछ आदतों में भी बड़े स्तर पर बदलाव होगा। ब्रिटेन के नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी में समाज विज्ञान के प्रो. रॉबर्ट डिंगवॉल का कहना है कि सामाजिक और सामुदायिक दूरी का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा।
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वे कहते हैं जिस तरह का समय अभी है इसको देखते हुए कम से कम अगले पांच साल तक लोग अभिवादन के लिए एक दूसरे को गले नहीं लगाएंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रो. पमेला पैरेस्की का कहना है कि लगता है कि अब ‘हाथ मिलाना बीते जमाने की बात हो गई है।’
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लोगों के भीतर सावधानी बरतने की आदत हो गई है जिसे अब खत्म करना मुश्किल होगा। युवाओं के भावनात्मक लगाव पर खतरा अमेरिकी सामाजिक विज्ञान विशेषज्ञ जोए फेगिन का कहना है कि स्पर्श से अभिवादन का तरीका खत्म होने से युवाओं में भावनात्मक लगाव को अधिक खतरा है।
अमेरिका और ब्रिटेन में हुए अध्ययन में 90 फीसदी लोग मुस्कुरा कर अभिवादन करना पंसद करने लगे हैं जबकि 50 फीसदी से अधिक युवा दोस्तों को हाथ मिलाने की बजाए हैलो बोलने में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं।
मानव स्पर्श से मजबूती मिलती है
वैज्ञानिकों का मानना है कि स्पर्श से एक-दूसरे को ताकत मिलती है। इसी से व्यक्तिगत और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं, लेकिन वायरस के चलते इसका चलन कम होगा और इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।
गैजेट्स का दखल बढ़ेगा
आदतों में इतना ज्यादा बदलाव संभव है कि वे दूर रहना ही पसंद करेंगे। जिंदगी में फोन और दूसरे गैजेट्स पहले ही जगह बना चुके थे। अब इनका दायरा और बढ़ेगा और हर कोई मुलाकातों से बचकर फोन, वीडियो कॉल और टीम के तौर पर ऑनलाइन गेम खेलकर उस दूरी को पाटने की कोशिश करेगा।
लॉकडाउन और वायरस के डर से दुनियाभर के लोग जितने दिन घरों में कैद रहेंगे उनके भीतर साफ-सफाई की आदत में सुधार होगा। हालात सामान्य होने के बाद भी लोग बार-बार हाथ धोएंगे क्योंकि वो उनकी आदत बन गई होगी। दूर होकर बात करना ही पसंद करेंगे क्योंकि दिमाग एक चीज को जब लंबे समय से करता है तो उससे अलग करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति को वैसा करने से रोकता है।
लॉकडाउन और वायरस के डर से दुनियाभर के लोग जितने दिन घरों में कैद रहेंगे उनके भीतर साफ-सफाई की आदत में सुधार होगा। हालात सामान्य होने के बाद भी लोग बार-बार हाथ धोएंगे क्योंकि वो उनकी आदत बन गई होगी। दूर होकर बात करना ही पसंद करेंगे क्योंकि दिमाग एक चीज को जब लंबे समय से करता है तो उससे अलग करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति को वैसा करने से रोकता है।