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Antyodaya Diwas: अंत्योदय दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? जानिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय से नाता

Tue, 23 Sep 2025 10:06 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 23 Sep 2025 10:06 AM IST
सार

Antyodaya Diwas 2025: अंत्योदय दिवस गरीबों, वंचितों और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के उत्थान की प्रतिज्ञा है। यह दिन हमें बताता है कि जब तक अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तब तक राष्ट्र निर्माण अधूरा है।

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Antyodaya Diwas 2025 Date Theme History and Significance Explained in Hindi
अंत्योदय दिवस - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

Antyodaya Diwas 2025: भारत में हर वर्ष 25 सितंबर को अंत्योदय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय जनसंघ के महान विचारक और दार्शनिक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर समर्पित है। उनका सपना था, “समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सुविधा पहुंचे।” इसी विचार को “अंत्योदय” कहा गया। अंत्योदय दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि विकास का असली अर्थ तभी है जब समाज का सबसे गरीब और वंचित व्यक्ति भी उससे लाभान्वित हो। अंत्योदय दिवस गरीबों, वंचितों और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के उत्थान की प्रतिज्ञा है। यह दिन हमें बताता है कि जब तक अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तब तक राष्ट्र निर्माण अधूरा है।

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अंत्योदय दिवस का इतिहास

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। वे भारतीय राजनीति में एकात्म मानववाद और अंत्योदय दर्शन के लिए जाने जाते हैं। उनकी सोच थी कि नीतियां और योजनाएं केवल संपन्न वर्ग तक सीमित न रहकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचें। इसी विचार को सम्मान देने और उनके योगदान को याद रखने के लिए 2014 में केंद्र सरकार ने 25 सितंबर को ‘अंत्योदय दिवस’ घोषित किया।
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अंत्योदय दिवस का महत्व 

  • यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज के सबसे कमजोर तबके को सशक्त बनाना ही असली विकास है। गरीबों के प्रति संवेदनशीलता जाग्रत करना इसका उद्देश्य है।
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  • यह दिन नीतियों का मूल्यांकन करता है। सरकारें और संस्थाएं इस दिन अपनी योजनाओं की समीक्षा करती हैं कि वे गरीबों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंची हैं।
  • यह सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देता है। समाज को प्रेरित किया जाता है कि वे सेवा, सहानुभूति और सहयोग के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन में सुधार लाएं।
  • अंत्योदय दिवस युवाओं के लिए प्रेरणा है। यह दिन छात्रों और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में जिम्मेदारी निभाने की सीख देता है।


पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अंत्योदय दर्शन

  • पं. दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि विकास का मूल्यांकन तभी सही होगा जब समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान हो।
  • उनका एकात्म मानववाद व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को जोड़ने वाला दर्शन है।
  • “अंत्योदय” यानी अंतिम व्यक्ति तक उदय, यही उनके जीवन का मूल उद्देश्य था।
  • इसी सोच ने भारतीय राजनीति में गरीब-कल्याण केंद्रित योजनाओं को दिशा दी।
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