Industry 4.0: नए जमाने में नौकरी चाहिए तो सीख लें ये तकनीक, नहीं तो पिछड़ जाएंगे आप
यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के वाइस चांसलर प्रो. बीजे राव ने कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि किसी बच्चे को बाजार में आने वाली हर नई तकनीक के लिए दक्ष नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करना संभव नहीं है। लेकिन यह बहुत संभव है कि बच्चे के अंदर यह प्रतिभा विकसित की जा सके कि वह हर नई बदलती तकनीक के अनुसार अपने को ढाल सके...
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक सामने आने के साथ से ही यह बहस शुरू हो गई है कि यह इंसानी सभ्यता के लिए वरदान साबित होगी, या यह युवाओं की नौकरियां खा जाएगी और इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। इस बहस के बीच औद्योगिक क्षेत्र में इसका जमकर स्वागत किया जा रहा है क्योंकि सेक्टर यह मानकर चल रहा है कि इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, लागत में कमी आएगी। चिकित्सकीय-जीवन रक्षक मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से गलती शून्य हो जाने के कारण ज्यादा जीवन बचाए जाने की उम्मीद भी जगी है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था अभी इस तकनीक के साथ कदमताल करने के लिए तैयार नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कालखंड में तकनीकी तौर पर दक्ष युवा तैयार करने के लिए भारत को अपनी शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम के साथ-साथ शिक्षकों में भी बड़े बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों की चिंता है कि इसके बिना भारत एक बार फिर कंप्यूटर क्रांति की तरह पिछड़ जाएगा और उसे पश्चिमी देशों से आयातित तकनीक पर ही निर्भर रहने के लिए मजबूर हो जाना पड़ेगा।
छात्रों को ये बताना जरूरी
एम्प्लॉयबिलिटी.लाइफ के चेयरमैन डॉ. मनीष मल्होत्रा ने अमर उजाला से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी सोचने से ज्यादा तेज गति से बढ़ रहा है। लेकिन अभी के स्तर पर यह कहना बहुत मुश्किल है कि इसके लंबी अवधि में क्या परिणाम होंगे और बाजार और नौकरियों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
लेकिन इतना तय है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हर औद्योगिक सेक्टर में तेजी से उपयोग बढ़ने वाला है। यदि युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार होना है, तो उन्हें इस तकनीक की बारीकियों से अवगत कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस समय भारत की शिक्षा व्यवस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हिसाब से बहुत पीछे है। हमारे विश्वविद्यालयों को नई चुनौती के अनुसार पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक दक्ष शिक्षकों की भी आवश्यकता है। यह अच्छी बात है कि केंद्र सरकार द्वारा लाई जा रही नई शिक्षा नीति में नई तकनीक को अपनाने को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं जिसका असर आने वाले समय में दिखाई पड़ेगा।
नए समय में लगभग सभी औद्योगिक सेक्टर के ढांचे, उपयोग में लाई जा रही मशीनों, इसकी तकनीक और उपयोग में लाए जा रहे कच्चे माल तक में बड़ा परिवर्तन आना है। इंडस्ट्री 4.0 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की प्रमुखता रहने वाली है। ऐसे में आने वाले समय के लिए बच्चों को शिक्षित करते समय उन्हें इन सभी विषयों के प्रति संवेदनशील बनाया जाना चाहिए।
हर नई तकनीक के लिए छात्रों को दक्ष करना संभव नहीं
यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के वाइस चांसलर प्रो. बीजे राव ने कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि किसी बच्चे को बाजार में आने वाली हर नई तकनीक के लिए दक्ष नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करना संभव नहीं है। लेकिन यह बहुत संभव है कि बच्चे के अंदर यह प्रतिभा विकसित की जा सके कि वह हर नई बदलती तकनीक के अनुसार अपने को ढाल सके। उसे इस सोच के आधार पर विकसित किया जा सकता है कि समय-समय पर तकनीक में बदलाव होता रहेगा और उसे आने वाली हर नई तकनीकी के अनुरूप उसे स्वयं को ढाल लेना चाहिए।
इंटरएक्टिव टूल विकसित करने की आवश्यकता
प्रो. बीजे राव ने कहा कि हमारे देश में युवाओं की एक बड़ी आबादी ऐसे लोगों की है, जिनके घर की पहली पीढ़ी शिक्षित हो रही है। ऐसे युवाओं के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए न तो उनके अभिभावक सक्षम होते हैं, और न ही उनके आसपास के शिक्षक इतने दक्ष होते हैं कि उनके प्रश्नों का उचित उत्तर उन्हें उपलब्ध करा सकें।
ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे बेहतर प्रयोग यह हो सकता है कि इसके माध्यम से एक ऐसा इंटरएक्टिव टूल (उपयोगकर्ता के प्रश्नों का बिल्कुल सटीक विश्लेषण कर उसका अधिकतम सटीक उत्तर देने में सक्षम तकनीक) विकसित किया जाए जिससे छात्रों को ज्यादा से ज्यादा सटीक उत्तर प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कर सकते हैं, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नई पीढ़ी को शिक्षित करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
प्रश्न ज्यादा, उत्तर कम
अमेजन इंडिया के वेब सर्विसेज के प्रमुख अधिकारी गौरव गुप्ता ने कहा कि हमारी सीखने की प्रक्रिया ऐसी है कि हम कुछ नया जानने की कोशिश करते समय सीखते कम हैं, लेकिन उससे जुड़े प्रश्न हमारे मन में ज्यादा पैदा होते हैं। यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को नए जमाने की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना हो, तो उनके इन प्रश्नों का नए संदर्भों के साथ उत्तर दिया जाना जरूरी है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक उद्योग और बाजार को एक नई ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम होगी। उन्होंने इस आशंका को निराधार बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लोगों की नौकरियां खा जाएगा और इसके आने के बाद बेकारी बढ़ जाएगी।