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करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Tue, 27 Aug 2019 03:21 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया जॉब डेस्क, अमर उजाला
जॉब डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Tue, 27 Aug 2019 03:21 PM IST
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SC order, Supreme Court rejects review petition for one work one salary of Bihar contract teachers 
सुप्रीम कोर्ट में नियोजित शिक्षकों की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की वेतन संबंधी याचिका खारिज कर दी है। यह पुनर्विचार याचिका बिहार के नियोजित शिक्षकों की ओर से दायर की गई थी। इसमें नियोजित शिक्षकों ने नियमित शिक्षकों के समान वेतन की मांग की थी। उनका कहना था कि समान काम के लिए उन्हें समान वेतन भी मिलना चाहिए।

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गौरतलब है कि बीते 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान वेतन देने से इनकार कर दिया था। इसके साथ-साथ इस मामले में पटना हाई कोर्ट का वह आदेश भी रद्द कर दिया था जिसमें नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया गया था। इसके खिलाफ बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने वह याचिका मंजूर की थी जिसमें बिहार सरकार ने अपना पूरा पक्ष रखा था।
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लेकिन 10 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के संबंध में नियोजित शिक्षकों ने पुनर्विचार याचिका लगाई थी। अब कोर्ट ने उस याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि उनके द्वारा दिए गए फैसले में कोई गलती नहीं है। इसलिए इस पर किसी तरह का पुनर्विचार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट के इस फैसला का असर बिहार के करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों पर होगा।
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क्या थी बिहार सरकार की दलील

इस मामले में बिहार सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि पटना हाई कोर्ट के आदेश से सरकार पर करीब 9500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। केंद्र ने भी इस पर बिहार सरकार का समर्थन किया था। कोर्ट में दिए गए अपने 36 पन्नों के हलफनामे में केंद्र ने कहा था कि नियोजित शिक्षक समान वेतन की श्रेणी में नहीं आते। अगर एक राज्य की मांग मानी गई तो दूसरे राज्यों से भी मांग उठेगी। इससे सरकार पर हर साल करीब 36,998 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ जाएगा। 


उल्लेखनीय है कि अभी नियोजित शिक्षकों को 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। समान वेतन लागू होने पर इन्हें 35 से 44 हजार रुपये तक सैलरी मिलती।


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