अजब-गजब: रेलवे ने पांच सालों में 12000 से भी ज्यादा पदों को किया समाप्त, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
2015 से लेकर 2021 तक 16 जोनल के अंतर्गत 12,022 पदों को ही गैरजरूरी करार दिया गया। हालांकि अभी भी पदों को समाप्त करने का सिलसिला थमा नहीं है, प्राप्त जानकारी के मुताबिक 2021-22 में रेलवे कुछ पदों का समाप्त कर सकती है।
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भारतीय रेलवे द्वारा पिछले पांच सालों में कई गैरजरूरी पदों को खत्म कर दिया गया है। बता दें कि नई तकनीक अपनाने के चलते भारतीय रेलवे ने 12,000 से भी ज्यादा पदों को समाप्त कर दिया गया है। आंकड़ों की बात करें भारतीय रेलवे ने तकरीबन 13,050 पदों पर समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, हालांकि 2015 से लेकर 2021 तक 16 जोनल के अंतर्गत 12,022 पदों को ही गैरजरूरी करार दिया गया। अन्य 1028 पदों को इस वजह से समाप्त नहीं किया गया था क्योंकि कुछ जोनल रेलवे ने इन पदों को जरूरी बताया था। बता दें कि अभी पदों को समाप्त करने का सिलसिला थमा नहीं है, प्राप्त जानकारी के मुताबिक 2021-22 में रेलवे कुछ पदों का समाप्त कर सकती है।
यह है 12,022 पदों का विस्तृत विवरण
कुल 12,022 पदों में से अधिकारी के 14 और इंस्पेक्टर (कॉमर्शियल) के 63 पदों को खत्म किया गया है। अन्य पद तकनीशियन व ग्रुप-डी (अब ग्रुप-सी) के थे। बता दें कि पदों को गैरजरूरी करार देने का एक मुख्य कारण आउटसोर्सिंग भी है। राजधानी, शताब्दी, मेल-एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के जनरेटर में इलेक्ट्रिकल-मैकैनिकल तकनीशियन, कोच में सहायक, ऑनबोर्ड सफाई आदि कामों को ठेके पर दे दिया गया है, जिसकी वजह से इन पदों को समाप्त कर दिया गया है। बता दें कि जानकारों का मनना है कि रेलवे के इस कदम की वजह से उसकी क्षमता कम हो जाएगी।
यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है- संसदीय समिति
रेलवे यूनियन एआईआरएफ के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि पदों को कर्मचारियों के कार्य अघ्ययन और क्षमता के आधार पर समाप्त किया जा रहा है। लेकिन इन रिपोर्ट को तैयार करने के लिए केवल 48 अथवा 72 घंटे का ही समय दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों की कार्य क्षमता को नापा नहीं जा सकता है। वहीं इस पर संसदीय समितियों का कहना है कि ट्रेन ड्राइवर, सहायक ड्राइवर, गार्ड, गैंगमैन जैसे संरक्षा वर्ग के पदों पर भर्ती न रखना गलत है। यह यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करने जैसा है। इसकी वजह से मौजूदा कर्मचारियों को 22 से लेकर 24 घंटों तक काम करना पड़ रहा है।