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29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़ी बड़ी खबर, जरूर पढ़ें
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 27 Apr 2016 05:02 AM IST
सार
- 29334 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्त को क्लीन चिट
- नियुक्तियों को अवैध करार देने की मांग खारिज
- न नियुक्तियां रद्द होंगी, ना वेतन रोका जा सकता है
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सहायक अध्यापकों की नियुक्त को क्लीन चिट
- फोटो : demo pics
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विस्तार
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29334 गणित-विज्ञान के सहायक अध्यापकों की नियुक्ति को अवैध करार देने और रद्द करने की मांग हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। नियुक्तियों को सही करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि नियुक्तियों हाईकोर्ट के निर्देशानुसार की गई हैं इनको न तो रद्द किया जा सकता है और न ही किसी का वेतन रोका जा सकता है।
योगेंद्र और 271 अन्य की ओर से याचिका दाखिल कर नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर ने सुनवाई की। याचिका का विरोध अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय ने किया। कहा गया कि याचिका में न तो चयन को चुनौती दी गई है और न ही चयन सूची को चुनौती दी गई है। इसलिए याचिकाएं पोषणीय नहीं है।
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योगेंद्र और 271 अन्य की ओर से याचिका दाखिल कर नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर ने सुनवाई की। याचिका का विरोध अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभू राय ने किया। कहा गया कि याचिका में न तो चयन को चुनौती दी गई है और न ही चयन सूची को चुनौती दी गई है। इसलिए याचिकाएं पोषणीय नहीं है।
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पीसीएस-जे प्री का संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश
संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश
- फोटो : getty
हाईकोर्ट ने पीसीएस-जे प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए दो प्रश्नों के जवाब गलत पाए जाने पर संशोधित परीक्षा परिणाम जारी करने का आदेश उप्र लोकसेवा आयोग को दिया है। अभ्यर्थियों ने इन प्रश्नों के आधार पर परिणाम को चुनौती दी थी। वान्या गुप्ता और रोहित नंदन शुक्ला की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की।
याचीगण का कहना था कि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा दी थी, मगर कट ऑफ मार्क्स से एक अंक कम होने के कारण उनका चयन मुख्य परीक्षा के लिए नहीं हो सका। पूछे गए प्रश्नों के उत्तर का मिलान करने पर पता चला कि उप्र लोकसेवा आयोग द्वारा जारी उत्तर कुंजी में दो प्रश्नों के गलत जवाब दिए गए थे। कोर्ट ने इन प्रश्नों पर विशेषज्ञ राय लेने का आयोग को निर्देश दिया था।
विशेषज्ञ की राय के बाद कोर्ट ने एक प्रश्न का सही जवाब बद्रीनाथ मंदिर का कुमायूं पहाड़ियों पर स्थित होना माना, जबकि दूसरे का सही जवाब था कि प्रदेश निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। कोर्ट ने इन प्रश्नों का ही सही उत्तर देने वाले अभ्यर्थियों को ही प्रश्नों का अंक देने का निर्देश दिया है, साथ ही परिणाम संशोधित करने को कहा है। याचिका पर अधिवक्ता अनिल तिवारी और अनिल शर्मा ने बहस की।
याचीगण का कहना था कि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा दी थी, मगर कट ऑफ मार्क्स से एक अंक कम होने के कारण उनका चयन मुख्य परीक्षा के लिए नहीं हो सका। पूछे गए प्रश्नों के उत्तर का मिलान करने पर पता चला कि उप्र लोकसेवा आयोग द्वारा जारी उत्तर कुंजी में दो प्रश्नों के गलत जवाब दिए गए थे। कोर्ट ने इन प्रश्नों पर विशेषज्ञ राय लेने का आयोग को निर्देश दिया था।
विशेषज्ञ की राय के बाद कोर्ट ने एक प्रश्न का सही जवाब बद्रीनाथ मंदिर का कुमायूं पहाड़ियों पर स्थित होना माना, जबकि दूसरे का सही जवाब था कि प्रदेश निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। कोर्ट ने इन प्रश्नों का ही सही उत्तर देने वाले अभ्यर्थियों को ही प्रश्नों का अंक देने का निर्देश दिया है, साथ ही परिणाम संशोधित करने को कहा है। याचिका पर अधिवक्ता अनिल तिवारी और अनिल शर्मा ने बहस की।