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झारखंड: साहिबगंज में गंगा तट पर अवैध खनन को लेकर एनजीटी सख्त, सभी पक्षों से जवाब तलब
Tue, 03 Nov 2026 07:01 AM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिबगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिबगंज
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 03 Nov 2026 07:01 AM IST
सार
साहिबगंज में गंगा नदी और तटीय क्षेत्रों में अवैध खनन, खनिज परिवहन और अनधिकृत भंडारण के मामले में एनजीटी ने सभी पक्षों के हलफनामे व जांच रिपोर्ट रिकॉर्ड पर ली हैं। याचिकाकर्ता से जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। याचिका में गंगा डॉल्फिन और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा बताया गया है।
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एनजीटी
- फोटो : संवाद
विस्तार
झारखंड के इकलौते गंगा तटीय जिले साहिबगंज में गंगा नदी और उसके तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल की ईस्टर्न जोन पीठ ने गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन, खनिजों के परिवहन और अनधिकृत भंडारण से जुड़े मामले की अहम सुनवाई की। अदालत ने मामले के सभी पक्षों द्वारा जमा किए गए हलफनामों और स्थलीय जांच रिपोर्टों को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिकाकर्ता को प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले साल 29 जनवरी की तारीख तय की है।
कोलकाता स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ईस्टर्न जोन पीठ में न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य डॉक्टर ए. सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह की तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका संख्या 162/2023 पर सुनवाई की। अदालत के पूर्व में जारी निर्देशों के अनुपालन में राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों सहित निजी कंपनियों ने अपने जवाब दाखिल किए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर को निर्देश मिले कि वे प्रशासन और अन्य पक्षों द्वारा प्रस्तुत हलफनामों का अध्ययन करके अपना प्रतिउत्तर प्रस्तुत करें।
ये भी पढ़ें- झारखंड: सरकार ने ग्रामीणों के पानी के लिए बनवाई 12.75 करोड़ की टंकी, आरोप- एनटीपीसी ने डायनामाइट से उड़ा दिया
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एनजीटी में दाखिल हुए सभी पक्षों के जवाब
अदालत में प्रस्तुत किए गए जवाबों में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झारखंड खान विभाग के सचिव, खान निदेशक, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नई दिल्ली के निदेशक और साहिबगंज के उपायुक्त के हलफनामे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जिला खनन अधिकारी और जिला परिवहन अधिकारी ने भी अपने विभागों की ओर से विस्तृत हलफनामे और क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से जुड़ी स्थलीय जांच रिपोर्ट पीठ के सामने रखीं।
सरकारी विभागों के अलावा मामले में नामजद निजी पक्षों ने भी अपने पक्ष में जवाब दाखिल किए हैं। मालदा की स्टोन बोल्डर आपूर्ति करने वाली संस्था जीके इंटरप्राइजेज और मुजफ्फरपुर की निर्माण कंपनी मां तारा इंटरप्राइजेज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अपना जवाब जमा किया। ट्रिब्यूनल ने इन सभी दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में दर्ज कर लिया है। अब याचिकाकर्ता की ओर से इन हलफनामों पर प्रतिउत्तर आने के बाद मामले में निर्णायक बहस आगे बढ़ेगी।
गंगा डॉल्फिन और जलीय तंत्र पर मंडराता खतरा
सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर साहिबगंज क्षेत्र में गंगा नदी और उसके घाटों की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि साहिबगंज में गंगा के किनारों और तटीय इलाकों से स्टोन बोल्डर, चिप्स और मेटल का बड़े पैमाने पर अवैध परिवहन हो रहा है। इसके साथ ही नदी के तटों पर अनधिकृत रूप से विशाल स्टॉकयार्ड संचालित किए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इन अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के कारण गंगा के जल में भारी प्रदूषण फैल रहा है। निरंतर प्रदूषण के कारण नदी का पूरा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। सबसे गंभीर चिंता यह उठाई गई है कि इस प्रदूषण की वजह से दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति गंगा डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। नदी के पर्यावरण में आ रही गिरावट से जलीय जीवों का प्राकृतिक वास नष्ट हो रहा है।
अवैध गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाने की मांग
याचिका के माध्यम से सैयद अरशद नसर ने एनजीटी से साहिबगंज में गंगा नदी और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे सभी प्रकार के खनिजों के उठाव पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई है। उन्होंने खनिजों के अवैध परिवहन और नदी तटों पर बने सभी अनधिकृत भंडारण स्थलों व स्टॉकयार्ड को तत्काल प्रभाव से बंद कराने का अनुरोध किया है।
साथ ही, याचिकाकर्ता ने गंगा नदी और उसके तटीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सभी दोषियों पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की मांग की है। याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि दोषियों से वसूल की जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि का उपयोग साहिबगंज में गंगा के प्रभावित पारिस्थितिकी तंत्र को पुरानी स्थिति में बहाल करने के लिए किया जाए।
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कोलकाता स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ईस्टर्न जोन पीठ में न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य डॉक्टर ए. सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह की तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका संख्या 162/2023 पर सुनवाई की। अदालत के पूर्व में जारी निर्देशों के अनुपालन में राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों सहित निजी कंपनियों ने अपने जवाब दाखिल किए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर को निर्देश मिले कि वे प्रशासन और अन्य पक्षों द्वारा प्रस्तुत हलफनामों का अध्ययन करके अपना प्रतिउत्तर प्रस्तुत करें।
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एनजीटी में दाखिल हुए सभी पक्षों के जवाब
अदालत में प्रस्तुत किए गए जवाबों में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झारखंड खान विभाग के सचिव, खान निदेशक, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन नई दिल्ली के निदेशक और साहिबगंज के उपायुक्त के हलफनामे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जिला खनन अधिकारी और जिला परिवहन अधिकारी ने भी अपने विभागों की ओर से विस्तृत हलफनामे और क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से जुड़ी स्थलीय जांच रिपोर्ट पीठ के सामने रखीं।
सरकारी विभागों के अलावा मामले में नामजद निजी पक्षों ने भी अपने पक्ष में जवाब दाखिल किए हैं। मालदा की स्टोन बोल्डर आपूर्ति करने वाली संस्था जीके इंटरप्राइजेज और मुजफ्फरपुर की निर्माण कंपनी मां तारा इंटरप्राइजेज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अपना जवाब जमा किया। ट्रिब्यूनल ने इन सभी दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में दर्ज कर लिया है। अब याचिकाकर्ता की ओर से इन हलफनामों पर प्रतिउत्तर आने के बाद मामले में निर्णायक बहस आगे बढ़ेगी।
गंगा डॉल्फिन और जलीय तंत्र पर मंडराता खतरा
सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर साहिबगंज क्षेत्र में गंगा नदी और उसके घाटों की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि साहिबगंज में गंगा के किनारों और तटीय इलाकों से स्टोन बोल्डर, चिप्स और मेटल का बड़े पैमाने पर अवैध परिवहन हो रहा है। इसके साथ ही नदी के तटों पर अनधिकृत रूप से विशाल स्टॉकयार्ड संचालित किए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इन अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के कारण गंगा के जल में भारी प्रदूषण फैल रहा है। निरंतर प्रदूषण के कारण नदी का पूरा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। सबसे गंभीर चिंता यह उठाई गई है कि इस प्रदूषण की वजह से दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति गंगा डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। नदी के पर्यावरण में आ रही गिरावट से जलीय जीवों का प्राकृतिक वास नष्ट हो रहा है।
अवैध गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाने की मांग
याचिका के माध्यम से सैयद अरशद नसर ने एनजीटी से साहिबगंज में गंगा नदी और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे सभी प्रकार के खनिजों के उठाव पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई है। उन्होंने खनिजों के अवैध परिवहन और नदी तटों पर बने सभी अनधिकृत भंडारण स्थलों व स्टॉकयार्ड को तत्काल प्रभाव से बंद कराने का अनुरोध किया है।
साथ ही, याचिकाकर्ता ने गंगा नदी और उसके तटीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सभी दोषियों पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की मांग की है। याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि दोषियों से वसूल की जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि का उपयोग साहिबगंज में गंगा के प्रभावित पारिस्थितिकी तंत्र को पुरानी स्थिति में बहाल करने के लिए किया जाए।