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झारखंड: सरकार ने ग्रामीणों के पानी के लिए बनवाई 12.75 करोड़ की टंकी, आरोप- एनटीपीसी ने डायनामाइट से उड़ा दिया

Mon, 02 Nov 2026 08:29 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 02 Nov 2026 08:29 PM IST
सार

हजारीबाग में एनटीपीसी ने कोयला खनन के लिए 12.75 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित जलापूर्ति टावर को डायनामाइट से ध्वस्त कर दिया। इससे पांच हजार ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया। विभाग ने प्राथमिकी दर्ज कराई।

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Jharkhand: Government built a water tank worth ₹12.75 crore for villagers
सांकेतिक - फोटो : AI

विस्तार

झारखंड के हजारीबाग जिले में कोयला खनन के लिए रास्ता बनाने के दौरान एनटीपीसी ने 12.75 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित वाटर टावर को डायनामाइट से उड़ा दिया। पचड़ा-जोरदाग ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत निर्मित इस टावर का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। इस कदम से क्षेत्र के लगभग पांच हजार ग्रामीणों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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जलापूर्ति लाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एनटीपीसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया है। विभाग ने बिना अनुमति और बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के संरचना ध्वस्त करने पर नाराजगी जताई है। राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए एनटीपीसी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने और नुकसान की भरपाई कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इसके बाद, विभाग ने केस दर्ज करा दिया है।
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बिना एनओसी संरचना ध्वस्त करने पर भड़के मंत्री
पेजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने बताया कि पचड़ा-जोरदाग ग्रामीण जलापूर्ति योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था। इस योजना पर 12.75 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे और संवेदक को अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका था। मंत्री ने कहा कि एनटीपीसी ने न तो विभाग से कोई अनुमति ली और न ही किसी प्रकार का एनओसी हासिल किया।
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बिना किसी पूर्व सूचना के डायनामाइट लगाकर पूरी संरचना को जमींदोज कर दिया गया। मंत्री ने कहा कि खनन या किसी अन्य विकास कार्य के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना पूरी तरह अनुचित है। एनटीपीसी को इस लापरवाही के लिए जवाब देना होगा। विभाग पूरे मामले की गहन समीक्षा कर रहा है और बिना अनुमति निर्माण ढांचा ढहाने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसा जाएगा।

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प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश और 25 करोड़ का नुकसान
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के सहायक अभियंता ने केरेडारी थाना प्रभारी को पत्र लिखकर एनटीपीसी की चट्टी बरियातू कोयला खनन परियोजना के महाप्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। पूर्व में भी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने पर विभाग ने जिला खनन पदाधिकारी हजारीबाग के माध्यम से एनटीपीसी को मरम्मत कराने को कहा था। इसके बाद 4 जुलाई, 2025 को जिला खनन पदाधिकारी ने महाप्रबंधक को मरम्मत के स्पष्ट निर्देश दिए थे। कई माह बीत जाने के बाद भी एनटीपीसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। मंत्री ने बताया कि यह नुकसान केवल एक टावर तक सीमित नहीं है। एकल ग्राम योजना (एसवीएस) के तहत बनी सात पानी की टंकियां और पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे बहुग्राम योजना (एमवीएस) और एसवीएस दोनों को मिलाकर राज्य सरकार को 25 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति हुई है।

क्षतिपूर्ति और विधायक की पहल
मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने साफ किया कि नियमानुसार किसी भी निर्माण से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर संबंधित संस्था को क्षतिपूर्ति देनी होती है। एनटीपीसी को इस पूरे नुकसान की भरपाई विभाग को करनी होगी। प्रभावित गांवों में वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था शुरू करने के लिए जो भी खर्च आएगा, वह राशि भी एनटीपीसी से ही वसूली जाएगी। इस बीच, बड़कागांव के विधायक रोशन लाल चौधरी ने भी पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। विधायक ने एनटीपीसी से क्षतिग्रस्त वाटर टावर, पाइपलाइन तथा अन्य सरकारी संपत्तियों की क्षतिपूर्ति वसूलने का आग्रह किया है। दूसरी ओर, एफआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद एनटीपीसी की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई जारी नहीं की गई है।

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