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रांची: छह महीने से वेतन नहीं, अब आर-पार की तैयारी; विश्वविद्यालय कर्मियों ने दी सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी

Tue, 29 Sep 2026 09:36 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Tue, 29 Sep 2026 09:36 PM IST
सार

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और इसके अधीन कॉलेजों के आउटसोर्सिंग कर्मियों ने छह महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मियों ने तीन दिवसीय हड़ताल और तालाबंदी का एलान किया है। मांगें पूरी नहीं होने पर एक अक्तूबर को सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी दी गई है।

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Warning of mass self-immolation on October 1; demands for salary payment and opening of PF accounts.
प्रदर्शन करते आउटसोर्सिंग कर्मी

विस्तार

रांची के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और इसके अंतर्गत आने वाले विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों ने छह महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र सौंपकर तीन दिवसीय हड़ताल और विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी का एलान किया है। मांगें पूरी नहीं होने पर एक अक्तूबर 2026 को दोपहर दो बजे सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी भी दी गई है।

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कर्मियों के अनुसार, वेतन भुगतान को लेकर 24 सितंबर को भी विश्वविद्यालय प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है।

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आउटसोर्सिंग कर्मियों ने निर्धारित और वास्तविक भुगतान की राशि में भी अंतर होने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, गार्ड के लिए 24 हजार रुपये निर्धारित हैं, जबकि 16,300 रुपये दिए जा रहे हैं। इसी तरह चपरासी को 18,500 रुपये के बजाय 8,500 रुपये, कंप्यूटर ऑपरेटर और इलेक्ट्रीशियन को 24,800 रुपये के बजाय 12 हजार रुपये, माली को 18,700 रुपये के बजाय 12,800 रुपये और सफाई कर्मियों को 16,300 रुपये के बजाय 7,500 रुपये भुगतान किए जाने का आरोप है।

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कर्मियों ने पीएफ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पीएफ के नाम पर राशि की कटौती की गई, लेकिन अब तक उनके पीएफ खाते नहीं खोले गए हैं।

कर्मियों के मुताबिक, पूरे पलामू प्रमंडल में विश्वविद्यालय और उसके अधीन विभिन्न कॉलेजों में करीब 125 आउटसोर्सिंग कर्मी कार्यरत हैं। उन्होंने 1 अक्टूबर तक बकाया वेतन का भुगतान करने की मांग की है। सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी के बाद मामला गंभीर हो गया है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर है।

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