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झारखंड: पाठ्यपुस्तक में कविता छपी, लेकिन लेखक का नाम नहीं; अभिरंजन कुमार ने जेसीईआरटी पर लगाए आरोप

Tue, 29 Sep 2026 07:26 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Tue, 29 Sep 2026 07:26 PM IST
सार

झारखंड की कक्षा पांच की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘भाषांजलि’ में साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार की बाल कविता ‘बन गया खाना’ कथित तौर पर बिना अनुमति और नाम के प्रकाशित किए जाने का मामला सामने आया है। 

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JCERT accused of publishing writer Abhiranjan's poem without permission; legal action threatened
साहित्यकार अभिरंजन कुमार

विस्तार

झारखंड काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग की कक्षा पांच की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘भाषांजलि’ में साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार की चर्चित बाल कविता ‘बन गया खाना’ को कथित तौर पर बिना अनुमति प्रकाशित किए जाने का मामला सामने आया है।

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अभिरंजन कुमार का आरोप है कि उनकी कविता को पिछले करीब 11 वर्षों से पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है, लेकिन इसके लिए उनसे अनुमति नहीं ली गई और न ही उन्हें रॉयल्टी दी गई। उनका यह भी कहना है कि पुस्तक में कविता के साथ उनके नाम का उल्लेख तक नहीं किया गया है।

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अभिरंजन कुमार के अनुसार, ‘बन गया खाना’ उनकी चर्चित बाल कविता संग्रह ‘बचपन की पचपन कविताएं’ में शामिल है। इसके अलावा यह कविता अन्य प्रकाशकों की पुस्तकों, ‘बच्चों के सर्वश्रेष्ठ गीत’ जैसे बाल साहित्य संग्रह और करीब 27 वर्ष पहले एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार में भी प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों द्वारा कविता पर प्रस्तुत किए गए वीडियो देखने के दौरान उन्हें पता चला कि उनकी रचना जेसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में उनके नाम के बिना प्रकाशित है।

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उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तक में अन्य रचनाकारों के नाम भी रचनाओं के साथ स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए हैं। लेखकों के नाम पुस्तक के अंतिम पन्ने पर दिए गए हैं, लेकिन उनका नाम वहां भी उनकी कविता के साथ दर्ज नहीं है। अभिरंजन कुमार ने कहा कि यह केवल उनके लेखकीय सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि भविष्य में उनकी रचना को अन्य प्रकाशकों द्वारा लेखक के नाम के बिना प्रकाशित किए जाने का जोखिम भी पैदा करता है।

अभिरंजन कुमार ने कहा कि प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे साहित्यकारों के साथ उनकी रचना का बच्चों को पढ़ाया जाना उनके लिए गौरव की बात होनी चाहिए थी, लेकिन जेसीईआरटी के रवैये ने इस अनुभव को पीड़ादायक बना दिया। उन्होंने कहा कि यदि जेसीईआरटी तत्काल भूल सुधार करते हुए उनके सम्मान और अधिकारों के हनन की क्षतिपूर्ति नहीं करता है, तो कानूनी कार्रवाई अंतिम विकल्प हो सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कार्रवाई से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।

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वहीं, पूर्व शिक्षा मंत्री एवं राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कविता पिछले 11 वर्षों से प्रकाशित हो रही थी तो साहित्यकार को उसी समय इस पर दावा करना चाहिए था। अब जानकारी मिलने के बाद उन्हें अपनी रचना के संबंध में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अपने अधिकार को साबित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रचना के अधिकार और पंजीकरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज यदि लेखक के पास हैं, तो उन्हें प्रस्तुत कर मामले को स्पष्ट करना चाहिए।

अभिरंजन कुमार के अब तक तीन कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और बाल साहित्य के क्षेत्र में उनकी कई रचनाएं विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं और संग्रहों में प्रकाशित हुई हैं।

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