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झारखंड: जेपीएससी के खाली पदों पर हाईकोर्ट सख्त, अध्यक्ष-सदस्यों की नियुक्ति दो महीने में करने का आदेश
Thu, 10 Sep 2026 06:20 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 10 Sep 2026 06:20 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को अगले दो महीने के भीतर भरने का आदेश दिया है। अदालत ने 19 नवंबर तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को झारखंड लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों को अगले दो महीने के भीतर भरने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकार को इस नियुक्ति प्रक्रिया को हर हाल में समय-सीमा के अंदर पूरा करना होगा।
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 19 नवंबर से पहले की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तिथि तय की है।
महाधिवक्ता ने पेश की समय-सीमा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित महाधिवक्ता ने खंडपीठ के समक्ष सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पड़े पदों को भरने के प्रति पूरी तरह गंभीर है। महाधिवक्ता ने न्यायालय को भरोसा दिलाया कि आने वाले दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने की प्रबल संभावना है।
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उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने आयोग में लंबे समय से लंबित पदों पर बहाली को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। उस समय अदालत ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
वन विभाग की स्थिति पर लिया संज्ञान
उच्च न्यायालय का यह आदेश राज्य के वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और विशेष रूप से वन विभाग में प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्ति न हो पाने की मुख्य वजह झारखंड लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों का पद रिक्त होना है। आयोग में शीर्ष पद खाली रहने के कारण भर्ती प्रक्रियाएं अटकी हुई थीं।
ये भी पढ़ें- रांची में बड़ा हादसा: पानी टंकी का टावर गिरा, मलबे में दबकर दो मजदूरों की मौत; तीन को किया गया रेस्क्यू
नई भर्तियों और परीक्षाओं में उम्मीद
उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद अब राज्य में नई परीक्षाओं के आयोजन और लटकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद जगी है। आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद भरे जाने से विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर बहाली का रास्ता साफ होगा। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह तय समय में सभी आवश्यक कदम उठाए और प्रगति की जानकारी 19 नवंबर तक प्रस्तुत करे।
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चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 19 नवंबर से पहले की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तिथि तय की है।
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महाधिवक्ता ने पेश की समय-सीमा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित महाधिवक्ता ने खंडपीठ के समक्ष सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पड़े पदों को भरने के प्रति पूरी तरह गंभीर है। महाधिवक्ता ने न्यायालय को भरोसा दिलाया कि आने वाले दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने की प्रबल संभावना है।
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उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने आयोग में लंबे समय से लंबित पदों पर बहाली को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। उस समय अदालत ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
वन विभाग की स्थिति पर लिया संज्ञान
उच्च न्यायालय का यह आदेश राज्य के वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और विशेष रूप से वन विभाग में प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्ति न हो पाने की मुख्य वजह झारखंड लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों का पद रिक्त होना है। आयोग में शीर्ष पद खाली रहने के कारण भर्ती प्रक्रियाएं अटकी हुई थीं।
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नई भर्तियों और परीक्षाओं में उम्मीद
उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद अब राज्य में नई परीक्षाओं के आयोजन और लटकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद जगी है। आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद भरे जाने से विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर बहाली का रास्ता साफ होगा। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह तय समय में सभी आवश्यक कदम उठाए और प्रगति की जानकारी 19 नवंबर तक प्रस्तुत करे।