{"_id":"6aa2ae1ac35c7c3fbc023e77","slug":"lohardaga-sadar-hospital-employees-regularization-high-court-order-2026-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"झारखंड: अस्पताल के कर्मचारियों को कोर्ट से राहत, 10 साल से सेवा दे रहे एंबुलेंस चालक-नाइट वॉचमैन होंगे नियमित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झारखंड: अस्पताल के कर्मचारियों को कोर्ट से राहत, 10 साल से सेवा दे रहे एंबुलेंस चालक-नाइट वॉचमैन होंगे नियमित
Thu, 10 Sep 2026 06:48 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 10 Sep 2026 06:48 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने लोहरदगा सदर अस्पताल में करीब 10 वर्षों से सेवाएं दे रहे एंबुलेंस चालकों और नाइट वॉचमैन के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित प्राधिकार को 12 सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने को कहा है।
विज्ञापन
झारखंड उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने लोहरदगा सदर अस्पताल में करीब 10 वर्षों से सेवाएं दे रहे एंबुलेंस चालकों और नाइट वॉचमैन के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से लंबे समय से अस्थायी तौर पर काम कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने संबंधित प्राधिकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर नियमितीकरण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए।
लोहरदगा सदर अस्पताल में एंबुलेंस चालक और नाइट वॉचमैन के रूप में कार्यरत कर्मचारी करीब एक दशक से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके बावजू,द प्रशासन ने उन्हें वर्तमान कार्य से हटाकर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से काम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
विज्ञापन
कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधीन काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। इस कदम से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता रफीक अंसारी और अन्य कर्मचारियों ने झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने याचिका में आग्रह किया था कि उनकी लंबी और निर्बाध सेवा अवधि को देखते हुए उन्हें नियमित किया जाए और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम करने के लिए बाध्य न किया जाए।
अदालत से पूर्व में मिली अंतरिम राहत
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की थी। अदालत ने संबंधित विभाग और प्राधिकार को आदेश दिया था कि कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से सेवाएं देने के लिए विवश न किया जाए। इस अंतरिम आदेश से कर्मचारियों को तात्कालिक सुरक्षा मिली थी।
ये भी पढ़ें- JSSC CGL पेपर लीक का खुलासा: 15 अभ्यर्थियों से वसूले 1.80 करोड़, नेपाल-बोकारो के होटलों में रटवाए 120 सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कर्मचारियों के लंबे सेवाकाल और आउटसोर्सिंग व्यवस्था से उत्पन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। पीठ ने मामले में सभी पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने के पश्चात रिट याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने 12 सप्ताह की समयावधि तय करते हुए अधिकारियों को नियमितीकरण की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने संबंधित प्राधिकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर नियमितीकरण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए।
विज्ञापन
लोहरदगा सदर अस्पताल में एंबुलेंस चालक और नाइट वॉचमैन के रूप में कार्यरत कर्मचारी करीब एक दशक से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके बावजू,द प्रशासन ने उन्हें वर्तमान कार्य से हटाकर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से काम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
विज्ञापन
कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधीन काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। इस कदम से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता रफीक अंसारी और अन्य कर्मचारियों ने झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने याचिका में आग्रह किया था कि उनकी लंबी और निर्बाध सेवा अवधि को देखते हुए उन्हें नियमित किया जाए और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम करने के लिए बाध्य न किया जाए।
अदालत से पूर्व में मिली अंतरिम राहत
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की थी। अदालत ने संबंधित विभाग और प्राधिकार को आदेश दिया था कि कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से सेवाएं देने के लिए विवश न किया जाए। इस अंतरिम आदेश से कर्मचारियों को तात्कालिक सुरक्षा मिली थी।
ये भी पढ़ें- JSSC CGL पेपर लीक का खुलासा: 15 अभ्यर्थियों से वसूले 1.80 करोड़, नेपाल-बोकारो के होटलों में रटवाए 120 सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कर्मचारियों के लंबे सेवाकाल और आउटसोर्सिंग व्यवस्था से उत्पन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। पीठ ने मामले में सभी पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने के पश्चात रिट याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने 12 सप्ताह की समयावधि तय करते हुए अधिकारियों को नियमितीकरण की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है।