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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने वाले की पत्नी को नहीं मिलेगी अनुकंपा नौकरी
Wed, 09 Sep 2026 07:55 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 09 Sep 2026 07:55 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते सक्षम प्राधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना दूसरी शादी करने वाले सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती।
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झारखंड उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी के जीवित रहते सक्षम प्राधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना दूसरी शादी करता है, तो उसकी मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी का दावा नहीं कर सकती। यह नियम जनजातीय परंपराओं या प्रथागत कानूनों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।
सेवा नियमावली के समक्ष परंपरा अप्रभावी
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सरकारी सेवा नियमावली के नियम 23 (2) के अनुसार, किसी भी सरकारी सेवक को पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह करने से पूर्व संबंधित विभाग से लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संथाली जनजाति की परंपराओं या प्रथागत कानून का तर्क सेवा नियमों के सामने प्रभावहीन है, क्योंकि कर्मचारी ने दूसरा विवाह करने से पहले नियमानुसार कोई प्रशासनिक अनुमति नहीं ली थी। पीठ ने यह भी माना कि दूसरी पत्नी के नाबालिग बेटे को वित्तीय लाभ और ग्रेच्युटी का हिस्सा मिल चुका है, लेकिन इससे दूसरी पत्नी को अनुकंपा पर नियुक्ति पाने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता।
पंचायत सेवक के मामले में आया फैसला
यह पूरा मामला दिवंगत पंचायत सेवक बस्नवास मालतु से संबंधित है, जिनकी सेवाकाल के दौरान 11 जुलाई, 2011 को मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद कथित दूसरी पत्नी ने अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के संपूर्ण लाभों की मांग की थी। सं विभाग ने आवेदन को निरस्त कर दिया था। इसके विरोध में, दूसरी पत्नी ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी। एकल पीठ ने सुनवाई के बाद पहली पत्नी तथा दूसरी पत्नी के नाबालिग पुत्र के बीच ग्रेच्युटी बांटने का निर्देश दिया था, परंतु अनुकंपा नियुक्ति देने से साफ इन्कार कर दिया था।
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एकल पीठ के आदेश को रखा बरकरार
एकल पीठ के निर्णय के विरुद्ध दूसरी पत्नी ने खंडपीठ में अपील याचिका पेश की थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि संथाल जनजाति की रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार दूसरी शादी पूरी तरह वैध है। खंडपीठ ने इन तर्कों को अमान्य करते हुए एकल पीठ के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। अदालत ने अपील याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी कि विभागीय अनुमति के बिना किया गया दूसरा विवाह सेवा शर्तों का उल्लंघन है, इसलिए अनुकंपा नौकरी का अधिकार नहीं बनता।
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सेवा नियमावली के समक्ष परंपरा अप्रभावी
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सरकारी सेवा नियमावली के नियम 23 (2) के अनुसार, किसी भी सरकारी सेवक को पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह करने से पूर्व संबंधित विभाग से लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संथाली जनजाति की परंपराओं या प्रथागत कानून का तर्क सेवा नियमों के सामने प्रभावहीन है, क्योंकि कर्मचारी ने दूसरा विवाह करने से पहले नियमानुसार कोई प्रशासनिक अनुमति नहीं ली थी। पीठ ने यह भी माना कि दूसरी पत्नी के नाबालिग बेटे को वित्तीय लाभ और ग्रेच्युटी का हिस्सा मिल चुका है, लेकिन इससे दूसरी पत्नी को अनुकंपा पर नियुक्ति पाने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता।
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पंचायत सेवक के मामले में आया फैसला
यह पूरा मामला दिवंगत पंचायत सेवक बस्नवास मालतु से संबंधित है, जिनकी सेवाकाल के दौरान 11 जुलाई, 2011 को मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद कथित दूसरी पत्नी ने अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के संपूर्ण लाभों की मांग की थी। सं विभाग ने आवेदन को निरस्त कर दिया था। इसके विरोध में, दूसरी पत्नी ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी। एकल पीठ ने सुनवाई के बाद पहली पत्नी तथा दूसरी पत्नी के नाबालिग पुत्र के बीच ग्रेच्युटी बांटने का निर्देश दिया था, परंतु अनुकंपा नियुक्ति देने से साफ इन्कार कर दिया था।
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एकल पीठ के आदेश को रखा बरकरार
एकल पीठ के निर्णय के विरुद्ध दूसरी पत्नी ने खंडपीठ में अपील याचिका पेश की थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि संथाल जनजाति की रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार दूसरी शादी पूरी तरह वैध है। खंडपीठ ने इन तर्कों को अमान्य करते हुए एकल पीठ के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। अदालत ने अपील याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी कि विभागीय अनुमति के बिना किया गया दूसरा विवाह सेवा शर्तों का उल्लंघन है, इसलिए अनुकंपा नौकरी का अधिकार नहीं बनता।