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झारखंड सीजीएल पेपर लीक कांडः गुप्त सेंटर पर तीन घंटे में 370 सवाल रटाए, फिर जला दिए प्रश्नपत्र
Thu, 15 Oct 2026 11:05 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:05 PM IST
सार
झारखंड सीजीएल पेपर लीक मामले में एसआईटी जांच के अनुसार, पटना के गुप्त ठिकाने पर अभ्यर्थियों को तीन घंटे में तीन प्रश्नपत्रों के 370 सवालों के जवाब रटवाए गए। इसके बाद प्रश्नपत्र कथित तौर पर जला दिए गए। चयन का भरोसा देकर प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक लेने के आरोपों की जांच जारी है।
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झारखंड कर्मचारी चयन आयोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी- सीजीएल) भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में विशेष जांच टीम की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को पटना के एक गुप्त ठिकाने पर ले जाया गया था, जहां महज तीन घंटे के भीतर तीन अलग-अलग प्रश्नपत्रों के कुल 370 सवालों के जवाब उन्हें रटवाए गए थे।
गिरफ्तार अभियुक्तों के बयानों के अनुसार, जवाब रटवाने के बाद प्रश्नपत्रों को जला दिया गया, जबकि चयन का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक तक लिए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस सनसनीखेज रैकेट का संचालन पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन और अन्य बिचौलियों द्वारा किया गया था। इस नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपी संजय कुमार की मुख्य भूमिका सामने आई है।
ये भी पढ़ें- पटमदा सामूहिक दुष्कर्म मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने चारों दोषियों की 20 साल की सजा बरकरार रखी
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योजना के तहत 20 सितंबर 2024 को विभिन्न स्थानों से अभ्यर्थियों को पटना बुलाया गया। उन्हें गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के पास समूहों में एकत्र करने के बाद एक सुरक्षित मकान में ले जाया गया। वहां अभ्यर्थियों को तीनों प्रश्नपत्रों के उत्तर के तीन सेट दिए गए और उन्हें याद करने के लिए लगभग तीन घंटे का समय दिया गया। रटवाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबूत मिटाने के लिए उन प्रश्नपत्रों और उत्तरों के सेट को कथित तौर पर जला दिया गया। इसके बाद उम्मीदवारों को अलग-अलग समूहों में परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना किया गया।
एसआईटी की जांच में अनिल कुमार, विजय यादव, उत्तम कुमार, त्रिभुवन यादव, राम कृष्ण कुमार सिंह और अमित कुमार सहित कई ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें इस नेटवर्क का कथित तौर पर लाभ मिला। जांच में यह भी पता चला कि अमित कुमार ने दिसंबर 2024 में आरोपी संजय कुमार के बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये ट्रांसफर किए थे, जबकि अन्य लोगों द्वारा नकद भुगतान किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
गिरोह की रणनीति यह थी कि परिणाम आने से पहले पूरी रकम नहीं वसूली जाए। चयन की गारंटी के एवज में अभ्यर्थियों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी रखे गए थे, और परिणाम घोषित होने के बाद उनसे भारी-भरकम राशि वसूली जाती थी। फिलहाल एसआईटी इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, अन्य संलिप्त बिचौलियों और अभ्यर्थियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है।
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गिरफ्तार अभियुक्तों के बयानों के अनुसार, जवाब रटवाने के बाद प्रश्नपत्रों को जला दिया गया, जबकि चयन का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक तक लिए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस सनसनीखेज रैकेट का संचालन पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन और अन्य बिचौलियों द्वारा किया गया था। इस नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपी संजय कुमार की मुख्य भूमिका सामने आई है।
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योजना के तहत 20 सितंबर 2024 को विभिन्न स्थानों से अभ्यर्थियों को पटना बुलाया गया। उन्हें गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के पास समूहों में एकत्र करने के बाद एक सुरक्षित मकान में ले जाया गया। वहां अभ्यर्थियों को तीनों प्रश्नपत्रों के उत्तर के तीन सेट दिए गए और उन्हें याद करने के लिए लगभग तीन घंटे का समय दिया गया। रटवाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबूत मिटाने के लिए उन प्रश्नपत्रों और उत्तरों के सेट को कथित तौर पर जला दिया गया। इसके बाद उम्मीदवारों को अलग-अलग समूहों में परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना किया गया।
एसआईटी की जांच में अनिल कुमार, विजय यादव, उत्तम कुमार, त्रिभुवन यादव, राम कृष्ण कुमार सिंह और अमित कुमार सहित कई ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें इस नेटवर्क का कथित तौर पर लाभ मिला। जांच में यह भी पता चला कि अमित कुमार ने दिसंबर 2024 में आरोपी संजय कुमार के बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये ट्रांसफर किए थे, जबकि अन्य लोगों द्वारा नकद भुगतान किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
गिरोह की रणनीति यह थी कि परिणाम आने से पहले पूरी रकम नहीं वसूली जाए। चयन की गारंटी के एवज में अभ्यर्थियों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी रखे गए थे, और परिणाम घोषित होने के बाद उनसे भारी-भरकम राशि वसूली जाती थी। फिलहाल एसआईटी इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, अन्य संलिप्त बिचौलियों और अभ्यर्थियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है।