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लातेहार स्कूल यौन हिंसा मामला: भाजपा ने राज्य सरकार पर साधा निशाना, कहा– अधिकारी कर रहे पॉक्सो कोर्ट का काम

Sun, 20 Jul 2025 05:04 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 20 Jul 2025 05:04 PM IST
सार

Jharkhand: भाजपा प्रवक्ता ने मांग की कि इस गंभीर मामले में तत्काल पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए और झारखंड हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कम पॉक्सो कमिटी की निगरानी में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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Latehar School Assault Case: BJP Targets State Govt, Says Officials Acting Like POCSO Court
अजय साहू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लातेहार जिले के एक मिशनरी स्कूल में सामने आए कथित सामूहिक यौन शोषण मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साहू ने कहा कि राज्य सरकार के आला अधिकारी, विशेषकर शिक्षा सचिव और जिला प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 19 और 21 के मुताबिक, नाबालिग के साथ यौन शोषण की जानकारी मिलने पर इसकी लिखित सूचना देना अनिवार्य है। पुलिस को 24 घंटे के भीतर यह मामला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) और विशेष पॉक्सो कोर्ट को सौंपना होता है। अजय साहू ने सुप्रीम कोर्ट के शंकर किसनराव खाडे बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति यौन अपराध की जानकारी होने के बावजूद इसकी सूचना नहीं देता है तो उस पर पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत आपराधिक मामला बनता है।
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प्रेस वार्ता में उन्होंने एक ऑडियो क्लिप भी सुनाई, जिसमें छात्राओं ने आरोप लगाए हैं कि स्कूल के एक फादर बीते दो वर्षों से कई छात्राओं के साथ यौन शोषण कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक पॉक्सो एक्ट के तहत कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। इसे कानून की खुली अवहेलना बताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब झारखंड में पॉक्सो कोर्ट का काम भी अधिकारी करेंगे? उन्होंने पूछा कि पॉक्सो कानून की कौन सी धारा शिक्षा सचिव या अन्य अधिकारियों को जांच और फैसला सुनाने का अधिकार देती है? एक सप्ताह बीतने के बाद भी अब तक मामला पॉक्सो कोर्ट में क्यों नहीं पहुंचा?

एफआईआर दर्ज हो, हाईकोर्ट निगरानी में हो जांच
भाजपा प्रवक्ता ने मांग की कि इस गंभीर मामले में तत्काल पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए और झारखंड हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कम पॉक्सो कमिटी की निगरानी में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी पदाधिकारी इस मामले को दबाने में संलिप्त पाए जाएं, उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 21 और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

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