फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   jharkhand village without power

गजब! एक ऐसा गांव जहां से कोई शादी नहीं करता

Fri, 23 May 2014 12:22 PM IST
Updated Fri, 23 May 2014 12:22 PM IST
विज्ञापन
jharkhand village without power

"परेशानी कोई एक हो, तो बताएं। सड़क नहीं, खेती के लिए पानी नहीं। जब-तब जंगली हाथियों का उपद्रव। और बिजली के लिए तो गांव तरसता ही रह गया। दिल तब कचोटता है, जब बिजली न होने से कई मौक़े पर शादी-ब्याह के रिश्ते टूट जाते है। बेटी की शादी हो भी गई, तो दामाद आना नहीं चाहते। और बेटों की शादी के लिए जल्दी कोई लड़की नहीं देना चाहता।"

विज्ञापन


एक बार में यह सब बोलकर आदिवासी महिला सुखनंदिनी देवी खामोश हो जाती हैं। यह कहानी है आदिवासी बहुल बेंती गांव की। झारखंड की राजधानी रांची से क़रीब 50 किलोमीटर दूर पहाड़ों, जंगलों से घिरा गांव है बेंती। 16 टोलों के इस गांव में मुंडा, करमाली, बेदिया और पाहनों के 400 से अधिक परिवार हैं।
विज्ञापन


हम उबड़-खाबड़, पथरीले रास्तों से होकर गांव पहुंचे, तो हमारी मुलाक़ात अजय करमाली से हुई। उन्होंने बीए तक पढ़ाई की है और एक निजी स्कूल में दो हजार की पगार पर बच्चों को पढ़ाते हैं। गांव के सामाजिक, आर्थिक ताने-बाने से पूरी तरह वाकिफ़ अजय बताते हैं कि डेढ़ हजार से ज्यादा आबादी वाले इस गांव में रोज़ी-रोज़गार का संकट है और बड़ी परेशानी का सबब है बिजली।

विज्ञापन
विज्ञापन

बच्चों का भविष्य

jharkhand village without power

गांव के किसी घर में टीवी नहीं है। सांझ ढलते ही पूरा गांव वीरान हो जाता है। चिंता इसकी है कि बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है। अजय पढ़े-लिखे हैं, लिहाजा सवाल भी पूछते हैं। वे जानना चाहते हैं कि सरकार और उनके मुलाजिम दंभ भरते हैं कि राज्य में विकास का पहिया तेज़ी से घूम रहा है, तो वह पहिया बेंती गांव क्यों नहीं पहुंचा।

बिजली न होने से क्या शादी के रिश्ते भी टूट जाते हैं, इस सवाल पर अजय अपने एक मित्र के बारे में बताने लगे जिनकी शादी की सारी बात पक्की हो गई थी। लड़की के भाई जब गांव आए, तो बिजली का हाल देखकर रिश्ते से मना कर दिया। गांव के एक घर के सामने हमें सालिक राम पाहन मिले। वो महिला समिति के सदस्यों को समझा रहे थे कि कैसे खाता खोलना है, कैसे समूह चलाना है।

बिजली न होने के सवाल पर उन्होंने कहा, ''आदिवासियों का गांव है, हमारा विकास हो, इसकी चिंता किसे है।'' वहीं इंटरमीडिएट तक पढ़ी सुमन कहती हैं कि ढिबरी युग में जीना ही हमारा नसीब है, बिजली के बिना हम मानों जंगली ही रह गए।

ज़िंदगी भगवान भरोसे

jharkhand village without power

स्थानीय पत्रकार संतोष कुमार सिन्हा बताते हैं कि पिछले साल गांव के लोगों ने ढिबरी जुलूस निकाला था। सड़क न होने से बेंती गांव के लोगों को मुश्किलों का सामना करना होता है। बरसात के दिनों में तो आदिवासी परिवारों की ज़िंदगी पूरी तरह भगवान भरोसे होती है।

गांव प्रधान उमेश बड़ाइक ने बताया, ''जब चुनाव होता है, नेता आते हैं। किस्म-किस्म के वादे करते हैं।'' यह पूछने पर कि क्या चुनाव के बाद कोई अधिकारी या नेता गांव नहीं आते, वे कहते हैं, "कोई एकाध बार आए भी, तो आश्वासन के सिवाय हमें कुछ नहीं मिला।"

झारखंड में कुल 32,620 गांव हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अभी 34 सौ गांवों तक बिजली नहीं पहुंची है। सैकड़ों गांव की समस्या यह कि बिजली तो पहुंची, पर ट्रांसफ़ार्मर कम पावर के लगे हैं। सरकार ने 15,86,463 बीपीएल (ग़रीबी रेखा से नीचे) परिवारों को बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया था। इनमें क़रीब 13 लाख बीपीएल परिवारों को कनेक्शन दिए गए हैं, पर अभी 11 लाख लोगों के ही कनेक्शन चालू हो सके हैं।

पिछले महीने झारखंड विधानसभा में बजट पेश करते हुए राज्य के ऊर्जा मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने सदन को बताया था कि राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत 17 हज़ार 713 गावों के विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है। इनमें 16,666 गांवों को ऊर्जान्वित किया गया है। बाक़ी काम तेज़ी से किए जा रहे हैं।

झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (तकनीक) बताते हैं कि अगले छह महीने में छूटे हुए गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए रूरल फ्रेंचाइज़ी की नियुक्ति की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed