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झारखंड उच्च न्यायालय ने 'मॉब लिंचिंग’ और रांची हिंसा पर सरकार से मांगी रिपोर्ट

Mon, 08 Jul 2019 10:03 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 08 Jul 2019 10:03 PM IST
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Jharkhand High Court seeks report from Government on Mob lynching and Ranchi violence
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

झारखंड उच्च न्यायालय ने सरायकेला में हुई कथित ‘मॉब लिंचिंग’ और इसके बाद रांची के डोरंडा और एकरा मस्जिद के पास उपद्रव की घटनाओं पर सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। न्यायमूर्ति एचसी मिश्र और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरायकेला की कथित ‘मॉब लिंचिंग’ की घटना और उसके बाद सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सरकार से मांगी है। वहीं, रांची की हिंसा की घटनाओं पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 17 जुलाई तक पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश अदालत ने दिया है।

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याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालना) गंभीर मामला है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन इसके बाद रांची में हुई हिंसा की घटनाएं उससे भी गंभीर हैं। इन घटनाओं को सामान्य नहीं माना जा सकता।
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सरायकेला में 28 जून को मोहम्मद तबरेज नामक युवक पर चोरी का आरोप लगाते हुए भीड़ ने उसकी पिटाई कर दी थी। बाद में उसे पुलिस को सौंप दिया गया था। पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के विरोध में पांच जुलाई को डोरंडा में मुस्लिम संगठनों की सभा के बाद डोरंडा में वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव किया गया था। एक बस को जलाने की कोशिश भी की गई थी। शाम को हवाईअड्डे के पास कुछ युवकों की पिटाई के विरोध में रतन टॉकीज चौक को जाम कर दिया गया था। दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ की गयी थी और दो लोगों को चाकू मारकर घायल कर दिया गया था।
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सरायकेला में ‘मॉब लिंचिंग’ की घटना के बाद झारखंड हाईकोर्ट में पंकज यादव ने जनहित याचिका दायर की। इसमें आरोप लगाया गया है कि झारखंड में 18 मार्च 2016 से अब तक ‘मॉब लिंचिंग’ में 18 लोगों की जान जा चुकी है। रामगढ़ में हुई घटना के बाद से इस तरह के मामलों को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

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