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Jharkhand: झारखंड सरकार ने केंद्र के खिलाफ शुरू की कानूनी कार्रवाई, 1.36 लाख करोड़ रुपये हैं बकाया

Wed, 18 Dec 2024 11:40 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 18 Dec 2024 11:40 AM IST
सार

अधिसूचना में कहा गया है कि 'राजस्व, पंजीकरण और भूमि सुधार सचिव को केंद्र से 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया वसूलने के लिए तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।

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Jharkhand government initiates process for legal action to realize coal dues from Centre
हेमंत सोरेन - फोटो : X / @HemantSorenJMM

विस्तार

झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार से 1.36 लाख करोड़ रुपये का बकाया वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कोयला बकाया है। झारखंड सरकार ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर राजस्व, पंजीकरण और भूमि सुधार सचिव को केंद्र के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिकृत किया। गौरतलब है कि पिछले महीने झारखंड सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में भी बकाया वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई थी। 
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नोडल अधिकारी को नामित किया गया
अधिसूचना में कहा गया है कि 'राजस्व, पंजीकरण और भूमि सुधार सचिव को केंद्र से 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया वसूलने के लिए तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। कोयले की रॉयल्टी बकाया, सामान्य बकाया आदि और कोल इंडिया की सहायक कंपनियों द्वारा भुगतान में बाधाओं के मामले में, महाधिवक्ता के परामर्श से कदम उठाए जाने चाहिए।' मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पिछले महीने शपथ लेने के बाद कहा था कि बकाया वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने केंद्र से हाथ जोड़कर अनुरोध किया था कि वह राज्य का करोड़ों रुपये का कोयला बकाया चुकाए। 
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हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर की थी अपील
2 नवंबर को सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में भी हेमंत सोरेन ने लिखा था कि, 'प्रधानमंत्री और गृह मंत्री झारखंड आ रहे हैं। मैं एक बार फिर उनसे हाथ जोड़कर अनुरोध करता हूं कि वे झारखंडियों को 1.36 लाख करोड़ रुपये का बकाया (कोयला बकाया) चुकाएं। यह राशि झारखंड के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं अपने भाजपा सहयोगियों, खासकर सांसदों से भी अपील करूंगा कि वे झारखंडियों को हमारा बकाया दिलाने में मदद करें।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बकाया राशि राज्य का अधिकार है और कहा कि निकासी न होने से झारखंड के विकास को नुकसान हो रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि राज्य को खनन और रॉयल्टी बकाया वसूलने का अधिकार है।
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