'हां मुझे प्यार है, वो कौन होते हैं हमें मारने वाले'
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'हां मुझे प्यार है, पर वे कौन होते हैं मेरी जान लेने वाले? पहले पेड़ से लटका कर मारा, उससे भी मन नहीं भरा तो गर्म सलाखों से दागा। हमारे मां- बाप तो शादी कराने को राजी हैं और इज़्ज़त उनकी जाने लगी।' मनी कुमारी एक सांस में यह सब कह जाती हैं और फिर शरीर पर ज़ख्मों को दिखाती हुई बेसुध पड़ जाती हैं। गनीमत है कि वहां पुलिस मौजूद होती है और आनन- फानन में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाता है।
झारखंड की राजधानी रांची से क़रीब 85 किलोमीटर दूर रामगढ़ ज़िले के सुदूर बोंगई गांव की 19 साल की दुबली- पतली ये दलित युवती दूसरे गांव के एक युवक से प्रेम करती है, हालांकि दोनों एक ही जाति के हैं, पर युवती के चचेरे भाइयों और समुदाय के अन्य लड़कों को यह नागवार गुजरता रहा।
मनी कुमारी और उनके परिवार वालों का आरोप है कि 12 मई की रात दस बजे युवती को घर से खींचकर बाहर निकाला, फिर पेड़ से लटका कर डंडे से पिटाई की और गर्म सलाखों से दागा गया। पहाड़ों और जंगलों से होते हुए जब हम इस गांव में पहुंचें, तो वहां तफ़्तीश के लिए पुलिस भी मौजूद थी।
घर के बाहर गर्म हवाओं के थपेडों के बीच एक खाट पर मनी लेटी पड़ी थी, वो कभी जख्मों को तो कभी पुलिस की तरफ देख रही थी। उनकी मां बिल्कुल खामोश थी और पिता के चेहरे पर खौफ़ का साया दिख रहा था।
गांव की महिलाएं और बच्चे, उस आम के पेड़ के नीचे बैठे थे, जिस पर युवती को लटका कर पीटने का आरोप है। रजरप्पा थाने के दारोगा उमेश शर्मा कहते हैं, "आठ लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है, वे फरार हैं, घरों पर ताला लटका है, लेकिन हम उन्हें जल्दी पकड़ेंगे।"
प्रेमी से बात करने पर चचेरे भाइयों और अन्य युवकों ने पीटा
मनी मैट्रिक पास हैं और पेटरवार प्रखंड के एक गांव के युवक से उन्हें प्रेम है, उनके मुताबिक़ लड़का कमाने के लिए मुंबई गया है, उसे घटना की जानकारी मिली है, वो यहां आएगा।
मनी बताती हैं, "घटना के दिन मैं उससे फ़ोन पर बात कर रही थी, रात में वे लड़के जब पिटाई कर रहे थे, तो बार- बार पूछते कि किससे बात करती हो। वे इस बात पर डंडा मारते रहे, पर मैं नाम नहीं बताती। लेकिन जब लगा कि अब जान नहीं बचेगी, तो नाम बताया और कहा कि अब मत मारो।"
मनी की मां मिंजिया गंझू बताती हैं कि वो डर से आधी रात को कई किलोमीटर दूर अपने नैहर भाग गई थीं, जबकि पिता बिगन गंझू कहते हैं कि वे गुहार लगाते रहे, पर उनका दिल नहीं पसीजा।
मनी ने बताया, "वो लोग बाबूजी को भी पीट रहे थे, तो मैंने कहा कि बाबा बूढ़े और कमज़ोर हैं उन्हें मत मारो, बदले में मुझे ही मारो"। मनी के मुताबिक, घाव तो सूख जाएंगे, लेकिन जिस कसूर पर उनके साथ दरिंदगी की गई शा़यद उसे भूलना मुश्क़िल होगा।
मनी के पिता बिगन गंझू गंवई अंदाज में कहते हैं, "जब बेटी बेहोश हे गेलय, तो हम कहलियो, अब तो जान रहे दे हो (जब बेटी बेहोश हो गई तो मैंने कहा कि अब जान तो बाक़ी रहने दो)।"
उन्होंने बताया कि कोयले के चूल्हे पर चिमटा गर्म कर दागा जाता था और बेटी के बेहोश हो जाने पर वो लोग कहते थे कि ढोंग कर रही है। वे बताते हैं पूरी रात बेटी दर्द से कराहती रही, वे कभी पानी पिलाते, तो कभी पैर दबाते. 'मनी रह- रह कहती कि बाबा अब नहीं बचूंगी।"
मार पिटाई के दौरान कोई नहीं आया बचाने, लोग घरों में दुबके
मनी की छोटी चाची बताती हैं कि डर से गांव का कोई भी व्यक्ति बचाने को नहीं आया और कई लोगों को नींद की वजह से दूसरे दिन जानकारी मिली। पीड़िता बताती हैं कि वे लड़के पुलिस और मुखिया के पास नहीं जाने की धमकी देते रहे।
दूसरे गांव से जब उनकी बहन और भाई घर आए, तो तीन दिनों बाद उसने पुलिस में एफ़आईआर लिखाने की हिम्मत की, उनके घर वालों को इसका भी दुःख था कि प्रशासन का कोई अधिकारी उचित मदद नहीं कर रहा था।
रविवार को पुलिस ने उन्हें मेडिकल जांच के लिए भेजा और चार दिनों के लिए दवाइयां देकर घर भेज दिया गया। सोमवार को तबियत बिगड़ने पर दोबारा उन्हें अस्पताल भेजा गया।
गांव में ही मिले सामाजिक कार्यकर्ता यमुना सिंह और संतोष महतो का कहना था कि पीड़िता को सरकारी मदद की तत्काल ज़रूरत है, मुखिया ने भी गांव का दौरा किया है।
इस बीच राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ मांझी ने बोंगई गांव का दौरा किया है। उन्होंने पुलिस से इस मामले में कार्रवाई करते हुए, पीड़िता को सुरक्षा देने को कहा है।