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बवाल: झारखंड में भी अजान पर सवाल, भाजपा नेता ने कहा- इबादत के लिए लाउडस्पीकर की क्या जरूरत?
Thu, 25 Mar 2021 08:27 AM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Thu, 25 Mar 2021 08:27 AM IST
सार
मस्जिदों से अजान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग उत्तर प्रदेश के बाद अब झारखंड उच्च न्यायालय में भी की गई है। बता दें यह जनहित याचिका झारखंड हाई कोर्ट में भाजपा नेता अनुरंजन अशोक ने दाखिल की है।
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लाउडस्पीकर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भाजपा नेता का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण के लिए दिन में पांच बार लाउडस्पीकरों का उपयोग किया जाता है, जो कि नियम के विरुद्ध है। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि उनकी याचिका का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है और यह ध्वनि प्रदूषण की आम समस्या से निपटने के लिए दाखिल की गई है।
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अनुरंजन अशोक की तरफ से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1932 से पहले तक मस्जिद से जो अजान दी जाती थी, उसमें लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होता था। यह परंपरा बहुत बाद में शुरू की गई। लाउडस्पीकर से अजान देने का मजहब से कोई लेना-देना ही नहीं है, इसलिए लाउडस्पीकर से अजान दिए जाने पर बिना देर किए रोक लगनी चाहिए। इससे ध्वनि प्रदूषण पर भी रोक लगाई जा सकेगी।
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अनुरंजन ने कहा कि नियम के मुताबिक लाउडस्पीकर की आवाज 10 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन मस्जिदों में दिन में पांच बार तेज ध्वनि के साथ अजान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मस्जिद नियम का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर में इस मुद्दे को लेकर उन्होंने झारखंड सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अब उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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अशोक ने याचिका में सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे लोगों को यातायात भीड़ और अन्य मुद्दों से जूझना पड़ता है। अशोक ने अदालत में कहा कि ऐसा कोई कानून होना चाहिए जिससे किसी को परेशानी न हो। गौरतलब है कि भाजपा नेता ने इससे पहले राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ भी जेल मैनुअल उल्लंघन मामले में जनहित याचिका दायर की थी।