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हाईकोर्ट का फैसला: 10 वर्ष से कार्यरत संविदा अभियंताओं को करें नियमित

Fri, 06 Nov 2026 08:09 AM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, रांची।
अमर उजाला ब्यूरो, रांची। Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 06 Nov 2026 08:09 AM IST
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High Court ruling: Regularize contractual engineers who have been working for 10 years
झारखंड उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 10 वर्ष से अधिक समय से संविदा पर सेवा दे रहे 10 सहायक अभियंताओं को नियमित करने का कड़ा आदेश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को संपूर्ण प्रक्रिया फैसले की प्रति मिलने के 10 सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को उनकी 10 वर्ष की सेवा पूरी होने की तिथि से ही नियमित माना जाएगा और उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सभी वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ प्रदान किए जाएंगे।
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नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं रख सकते
अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता पिछले 13 वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि जब कर्मचारी पद के लिए आवश्यक योग्यता रखते हैं और वर्षों से निरंतर कार्य कर रहे हैं, तो केवल संविदा का लेबल लगाकर उन्हें नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता। इस संबंध में प्रार्थी अंजनी कुमार और वीर बहादुर वेंकट सिंह सहित अन्य अभियंताओं ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने अदालत में पक्ष रखा।
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पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुई थी नियुक्ति
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2013 में झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण में सहायक अभियंताओं के पद पर हुई थी। इस नियुक्ति के लिए बाकायदा चयन प्रक्रिया का पालन किया गया था। तत्पश्चात 28 दिसंबर 2012 को मेधा सूची जारी की गई थी और वर्ष 2013 में नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए थे। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उनकी नियुक्ति राज्य की आरक्षण नीति का पूरी तरह पालन करते हुए स्वीकृत तथा रिक्त पदों पर हुई थी। सेवा काल के दौरान उन्हें समय-समय पर सेवा विस्तार भी दिया गया और सातवें वेतन संशोधन का लाभ भी मिला।
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समयबद्ध सीमा में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश
याचिकाकर्ताओं ने 19 नवंबर, 2024 को सेवा नियमितीकरण के लिए विभाग में आवेदन दिया था, परंतु उस पर कोई कार्रवाई न होने के कारण उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि ये नियुक्तियां केवल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यभार को देखते हुए संविदा पर की गई थीं। सरकार ने कहा कि नियुक्ति पत्र में ही यह शर्त शामिल थी कि वे भविष्य में नियमितीकरण का दावा नहीं कर सकते। हालांकि उच्च न्यायालय ने सरकार के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए 10 सप्ताह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश सुनाया।
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