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Jharkhand: पिछले तीन सालों में 1526 नक्सली किए गए गिरफ्तार, झारखंड के डीजीपी नीरज सिन्हा ने दी जानकारी
Mon, 15 Aug 2022 08:24 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,रांची
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 15 Aug 2022 08:24 PM IST
सार
डीजीपी ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी अभियान चला रही है। इसी क्रम में 2019 से 2022 के बीच कुल 1,526 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इतने समय में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद के साथ ही नक्सलियों द्वारा वसूले गए लगभग 159 लाख रुपये जब्त किए गए हैं।
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नक्सली
- फोटो : Social Media
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विस्तार
झारखंड में पिछले तीन साल में 1,526 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं। झारखंड के पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झारखंड में पिछले तीन वर्षों में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान मुठभेड़ों में कम से कम 51 नक्सली मारे गए हैं। 76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के बाद रांची में पुलिस मुख्यालय में पुलिस कर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने इसकी जानकारी दी।
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तीन सालों में 1500 से ज्यादा नक्सली गिरफ्तार
डीजीपी ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी अभियान चला रही है। इसी क्रम में 2019 से 2022 के बीच कुल 1,526 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार नक्सलियों में एक पोलित ब्यूरो सदस्य, एक केंद्रीय समिति सदस्य, तीन विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, एक क्षेत्रीय समिति सदस्य, 12 जोनल कमांडर, 30 सब-जोनल कमांडर और 61 एरिया कमांडर शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि इतने समय में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद के साथ ही नक्सलियों द्वारा वसूले गए लगभग 159 लाख रुपये जब्त किए गए हैं। डीजीपी ने बताया कि बरामद किए गए हथियारों और गोला-बारूद में 136 पुलिस से लूटे गए हथियार, 40 नियमित हथियार, 74 पुलिस हथियारों सहित 590 देशी हथियार शामिल हैं। इसके साथ ही 37,541 कारतूस, 1,048 आईईडी और 9,616 डेटोनेटर भी जब्त किए गए हैं।
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नक्सली कर रहे आत्मसमर्पण
अपने संबोधन में उन्होंने आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए तैयार की गई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं। डीजीपी के मुताबिक, राज्य में 57 शीर्ष नक्सलियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। डीजीपी सिन्हा ने अपने भाषण के दौरान राज्य में साइबर अपराध को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया।
साइबर निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया गया
उन्होंने कहा कि उग्रवादी समूहों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राज्य में एक साइबर निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। साथ ही झारखंड में एक टोल फ्री साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया गया है। डीजीपी नीरज सिन्हा ने बताया कि साइबर अपराधियों ने 2019 से जून 2022 तक लोगों से 4.48 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। इन तीन सालों में राज्य में कुल 3,001 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही इन अपराधियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, क्लोन मशीन, स्वाइप कार्ड, वाहन और नकदी बरामद की गई है।
मानव तस्करी पर भी लगी रोकथाम
पिछले तीन सालों में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के निमित्त उन्होंने बताया कि सभी 24 जिलों में मानव तस्करी रोधी केंद्र स्थापित किए गए है। डीजीपी ने कहा कि राज्य में 2019 से 2022 के बीच मानव तस्करी से जुड़े कुल 329 मामले सामने आए हैं। इस अवधि के दौरान तस्करी के कुल 779 पीड़ितों को बचाया गया है।
पुलिस आधुनिकीकरण की बात करते हुए डीजीपी ने कहा कि राज्य के 521 पुलिस थानों को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जोड़ा गया है। इसके जरिए सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से थानों में एफआईआर की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है।