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श्ाव देने के लिए भी मांगी रिश्चत

Fri, 06 Sep 2013 06:44 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अलीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 06 Sep 2013 06:44 PM IST
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cremation stopped because of money

झारखंड के पाकूर जनपद की मरामई सुरैन अपनी बेटी सुनीता और गांव के आधा दर्जन लोगों के साथ मजदूरी के लिए दिल्ली जा रही थी। मगर ट्रेन में तबियत बिगड़ने पर उसकी अलीगढ़ आते-आते मौत हो गई। जीआरपी ने सोमवार को शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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मगर पोस्टमार्टम के बाद शव उसकी बेटी सुनीता को महज इसलिए नहीं सौंपा गया कि उसके पास देने के लिए 600 रुपए नहीं थे। रात भर परिवार शव के इंतजार में बैठा रहा।
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तड़के बात किसी तरह पूर्व मंत्री दलवीर सिंह तक पहुंची, तब शव दिया जाने लगा। मगर तब तक झारखंड से उसके परिजन अलीगढ़ के लिए चल दिए। उनका देर रात तक इंतजार चल रहा था। तय हुआ कि परिजनों के आने पर यहीं शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
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परिवार नाते से 40 वर्षीय बेवा मरामई के देवर मोहन टूटू ने बताया कि मरामई के साथ उसकी बेटी और हम आठ लोग दिल्ली जाने के लिए शुक्रवार को चले। लखनऊ में उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसे उतारकर वहां इलाज कराया। इसके बाद लखनऊ से फरक्का एक्सप्रेस से चले तो फिरोजाबद में फिर तबीयत बिगड़ी और यहां आते-आते दम तोड़ दिया।

सोमवार सुबह शव जीआरपी की मदद से पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। दिन में पोस्टमार्टम के बाद लिखा पढ़ी में कह दिया गया कि शव तुम ले जा सकते हो। मगर बाद में शव मांगा तो वहां पर तैनात कर्मचारी ने 600 रुपए की डिमांड की।

मेहनत मजदूरी कर पेट पालने वाले इन गरीबों पर किराए के सिवाय कुछ नहीं था। इसलिए उन्होंने झारखंड अपने परिजनों को खबर दे दी। वे रात में ही वहां से रवाना हो गए।

इधर, मंगलवार सुबह किसी माध्यम से खबर ठा. दलवीर सिंह तक पहुंची तो उन्होंने तत्काल जानकारी मुख्यमंत्री के निजी सचिव व एडी हेल्थ को दी।

इस शिकायत पर तत्काल डीएम से लेकर अन्य अधिकारियों तक को अवगत कराया। तब जाकर आनन-फानन शव परिजनों को दिया जाने लगा।

मगर परिजनों ने कह दिया कि अब उन्होंने झारखंड से अपने कुछ साथी बुलाए हैं। उसके बाद ही तय होगा कि शव ले जाएंगे या यहीं अंतिम संस्कार करेंगे। हालांकि यह तय हो गया है कि शव का यहीं मानव उपकार की मदद से अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।


यह आरोप निराधार हैं। शव इसलिए फ्रीजर में रखवाया कि उनके परिजन आने वाले थे। ये लोग यहां ठहरे हैं, इनके खाने पीने से लेकर उन्हें यहां सोने बिछाने तक के कपड़ों के लिए मदद की गई है। इससे ज्यादा तो रकम खर्च हो गई। ऐसे में 600 रुपए मांगने का आरोप निराधार है। यह भी तय हो गया है कि परिवार के आने पर यहीं अंतिम संस्कार किया जाएगा। कुछ लोग साजिश के तहत यह आरोप लगा रहे हैं।
जेबी सिंह, पोस्टमार्टम इंचार्ज फार्मासिस्ट

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