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धनबाद जज हत्याकांड: सीबीआई ने दो आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
Wed, 20 Oct 2021 09:05 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, धनबाद
पीटीआई, धनबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 20 Oct 2021 09:05 PM IST
सार
जांच एजेंसी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपपत्र 90 दिनों के भीतर दायर किया गया है।
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सीबीआई
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को 28 जुलाई को धनबाद के जज उत्तम आनंद की हत्या के मामले में ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके साथी राहुल वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपपत्र 90 दिनों के भीतर दायर किया गया है ताकि ऐसा न हो कि दोनों आरोपियों को जमानत मिल जाए।
49 वर्षीय जिला न्यायाधीश को 28 जुलाई को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के पास जॉगिंग करते समय एक भारी ऑटोरिक्शा ने टक्कर मार दी थी। ऑटो रिक्शा ड्राइवर तुरंत मौके से भाग गया था। 11 अक्तूबर को दिल्ली से सीबीआई की एक टीम ने ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके साथी राहुल वर्मा को सीबीआई के न्यायिक मजिस्ट्रेट और विशेष मजिस्ट्रेट अभिषेक श्रीवास्तव की अदालत में पेश किया था।
एजेंसी की दलील सुनने के बाद अदालत ने लखन और राहुल को न्यायिक हिरासत में धनबाद जेल भेज दिया था। सीबीआई ने 4 अक्तूबर को दोनों आरोपियों को तीसरी बार रिमांड पर लिया था। सीबीआई ने इनकी 11 दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने 7 दिन के लिए ही रिमांड पर भेजा था।
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लगातार बयान बदलते रहे थे आरोपी
इस केस में सीबीआई की मदद कर रहे विशेष पुलिस अधिकारी ने कहा कि दोनों आरोपी किसी पेशेवर अपराधी की तरह लगातार अपना बयान बदलते रहे। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट अस्पष्ट है और उसने एजेंसी को इस मामले में अपनी जांच में अधिक विशिष्ट होने का आदेश दिया था।
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49 वर्षीय जिला न्यायाधीश को 28 जुलाई को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के पास जॉगिंग करते समय एक भारी ऑटोरिक्शा ने टक्कर मार दी थी। ऑटो रिक्शा ड्राइवर तुरंत मौके से भाग गया था। 11 अक्तूबर को दिल्ली से सीबीआई की एक टीम ने ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके साथी राहुल वर्मा को सीबीआई के न्यायिक मजिस्ट्रेट और विशेष मजिस्ट्रेट अभिषेक श्रीवास्तव की अदालत में पेश किया था।
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एजेंसी की दलील सुनने के बाद अदालत ने लखन और राहुल को न्यायिक हिरासत में धनबाद जेल भेज दिया था। सीबीआई ने 4 अक्तूबर को दोनों आरोपियों को तीसरी बार रिमांड पर लिया था। सीबीआई ने इनकी 11 दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने 7 दिन के लिए ही रिमांड पर भेजा था।
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लगातार बयान बदलते रहे थे आरोपी
इस केस में सीबीआई की मदद कर रहे विशेष पुलिस अधिकारी ने कहा कि दोनों आरोपी किसी पेशेवर अपराधी की तरह लगातार अपना बयान बदलते रहे। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट अस्पष्ट है और उसने एजेंसी को इस मामले में अपनी जांच में अधिक विशिष्ट होने का आदेश दिया था।