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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Welcomed the decision to hold talks with all sides

घाटी में शांति सरकार के साथ ही अलगाववादियों की भी जिम्मेदारी: महबूबा

Wed, 07 Sep 2016 10:40 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Wed, 07 Sep 2016 10:40 PM IST
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Welcomed the decision to hold talks with all sides
लोगों को संबोध‌ित करतीं महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala
दिल्ली में हुई सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक में जम्मू-कश्मीर के सभी हितधारकों से बातचीत करने के लिए कदम उठाने के फैसले का मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने स्वागत किया है।
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उन्होंने कहा कि गतिरोध को समाप्त करने तथा जम्मू-कश्मीर में शांति, स्थिरता और समृद्धि को वास्तविकता में बदलने के लिए बातचीत और सुलह ही रास्ता है। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अलगाववादी नेतृत्व ने दुर्भाग्य से समस्या का समाधान खोजने के लिए राज्य के दौरे पर आए सांसदों के साथ मुलाकात से इनकार कर एक मौका खो दिया है। बातचीत का कोई विकल्प नहीं है।
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'खूनखराबे के दलदल से जल्दी निकलना होगा'

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राजनाथ सिंह और महबूबा मुफ्ती - फोटो : ANI
समस्या के हल के लिए किसी को किसी के साथ संलग्न होना ही होगा। जब राजनीतिक और लोकतांत्रिक साधनों के माध्यम से इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक अवसर था तो वार्ता से दूर होकर अलगाववादी नेतृत्व ने इस प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में सर्वदलीय बैठक में अपनाए गए प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर में संवाद की तात्कालिकता को दोहराया गया है। हम आशा करते हैं कि व्यापक संवाद के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने के लिए देश के राजनीतिक नेतृत्व द्वारा राज्य के सभी हितधारकों तक पहुंचने के लिए एक और सकारात्मक प्रयास किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को उम्र, लिंग, स्थिति या राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बगैर अशांति तथा असंतोष के विनाशकारी परिणामों ने पीड़ित किया है। उन्हें इस खूनखराबे के दलदल से जितनी जल्द बाहर निकाला जाए उतना ही बेहतर होगा।

शांति तथा समाधान की प्रक्रिया को एक अवसर देने की पूरी जिम्मेदारी न केवल सरकार की है बल्कि एक ठोस रोडमैप के साथ आगे की जिम्मेदारी अलगाववादी नेतृत्व पर भी है।

चौपट हो रही जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था

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प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि चुनौतियों तथा बाधाओं के बावजूद कश्मीर की दर्दनाक स्थिति में राज्य के सभी राजनीतिक विचारधारा तक पहुंचने और शांति व समाधान की प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी रूप में हिंसा केवल लोगों के लिए दुख लाती है। यह समस्या समाधान का साधन नहीं है। सार्वजनिक जीवन को बंधक बनाने से शांति की उपज नहीं होगी, बल्कि लोगों का दुख बढ़ेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे मर रहे हैं और अपंग हो रहे हैं। हमारा सामाजिक ताना-बाना फिसल रहा है। अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त है। पर्यटन प्रवाह शून्य है। शिक्षा के क्षेत्र में बेहद परेशानियां हैं। दुकानदार व्यापार करने में सक्षम नहीं है। परिवहन उद्योग को व्यापक पैमाने पर घाटा है।

औद्योगिक इकाइयां बंद हैं। विकास की प्रक्रिया रुक गई है। लोग घुटन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम कब तक इस आत्म विनाश को अनुमति देते रहेंगे इस पर विचार करना होगा।

हम सभी को राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण तरीके से काम करने के संकल्प को मजबूत करना होगा। समस्या के समाधान तथा राज्य में शांति की बहाली जनता की भागीदारी के माध्यम से करना होगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां शांतिपूर्ण वातावरण में रह सकें। 
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