सीमा पर तनाव के बीच सीमांत गांवों में फिर लौटी रौनक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसके बावजूद अधिकतर ग्रामीण अपने घरों को रुख कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अभी काफी लोग शाम को शिविरों में लौट जाते हैं। अधिकतर ग्रामीणों का कहना है कि मवेशियों के चारे आदि का प्रबंध करने के लिए वह घरों में जाते हैं और शाम को शिविरों में चले आते हैं।
अब्दुल्लियां के रमेश लाल, शाम लाल, बंसी लाल का कहना है कि रोजी रोटी का साधन खेतीबाड़ी है। इसके कारण उन्हें गांवों में आना पड़ता है। गोलाबारी में घायल हुए मवेशियों की देखभाल और उपचार के लिए में आना भी जरूरी है।
सीमा से सटे खेतों में नहीं हो पा रही कटाई
गांव चंदू चक्क के चौधरी कृष्ण लाल, पूर्ण चंद, सुरजीत सिंह का कहना है कि अगर सीमा पर माहौल बेहतर होता तो वह इन दिनों धान की कटाई कर रहे होते। हालात सामान्य नहीं होने से तारबंदी के पास की भूमि पर धान की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय सीमावर्ती ग्रामीणों के लिए काफी कठिन समय गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि न जाने कब पाकिस्तान गोलाबारी शुरू कर दे। एसडीएम आरएस पुरा विकास कुंडल कहा कि तारबंदी के आगे भूमि पर लगी धान की फसल की कटाई करवाने के लिए बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। धान की कटाई कराने के लिए प्रशासन नजर रख रहा है।