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J&K: करनी थी बेटी की शादी की तैयारी, बैठना पड़ा माइग्रेंट कैंप में
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 02 Oct 2016 05:57 PM IST
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विस्थापित हुए ग्रामीण
- फोटो : Amar Ujala
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दस अक्तूबर को बेटी की शादी है। पति के गुजर जाने से सारी जिम्मेदारियां अकेली मां पर हैं। सारे बंदोबस्त करने हैं, लेकिन कैसे? यह ख्याल मां के मन में समंदर की लहरों की तरह आ रहे हैं। घर में इस समय शादी का संगीत होना था, लेकिन पाक गोलों के डर ने माइग्रेंट कैंप में लाकर बिठा दिया। परगवाल सेक्टर के गांव राजपुरा से मुट्ठी के हायर सेकेंडरी स्कूल में पहुंची राज कुमारी ने अपने माइग्रेंट होने का दर्द बयां किया।
बताया कि कुछ साल पहले उनके पति की मौत हो गई। दो बेटे और एक बेटी है। बेटी पूजा की शादी दस अक्तूबर को होनी है। सारे बंदोबस्त करने हैं। शुक्रवार शाम को प्रशासन की तरफ से कहा गया कि गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थानों की तरफ चले जाएं। घर छोड़ कर चली तो आई हूं, लेकिन शादी की तैयारियां कैसे होंगी, यह समझ नहीं आ रहा। शनिवार को ही तो घर में संगीत बिठाना था।
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बताया कि कुछ साल पहले उनके पति की मौत हो गई। दो बेटे और एक बेटी है। बेटी पूजा की शादी दस अक्तूबर को होनी है। सारे बंदोबस्त करने हैं। शुक्रवार शाम को प्रशासन की तरफ से कहा गया कि गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थानों की तरफ चले जाएं। घर छोड़ कर चली तो आई हूं, लेकिन शादी की तैयारियां कैसे होंगी, यह समझ नहीं आ रहा। शनिवार को ही तो घर में संगीत बिठाना था।
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कैसे होगी बेटी की शादी
विस्थापित हुए ग्रामीण
- फोटो : PTI
शादी के दस दिन तक घर में शादी के पारंपरिक गीत संगीत का आयोजन होता है। एक-दो दिन की बात होती तो कोई बात नहीं थी, लेकिन बता रहे हैं कि कोई पता नहीं कि कब तक यहां रहना है। ऐसा ही रहा तो बेटी की शादी कैसे होगी।
बस यही सोच बार-बार सता रही है। ऐसा ही रहा तो एक दिन भी बेटी का संगीत नहीं होगा। राजपुरा में ही एक और परिवार है। जिनके घर नवंबर में शादी होनी है। राज कुमारी की तरह ही और कई परिवार हैं, जिनके घरों में शादियों की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हालात ने माइग्रेंट कैंप में लाकर खड़ा कर दिया है।
बस यही सोच बार-बार सता रही है। ऐसा ही रहा तो एक दिन भी बेटी का संगीत नहीं होगा। राजपुरा में ही एक और परिवार है। जिनके घर नवंबर में शादी होनी है। राज कुमारी की तरह ही और कई परिवार हैं, जिनके घरों में शादियों की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हालात ने माइग्रेंट कैंप में लाकर खड़ा कर दिया है।