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LOC पर सामने होकर भी नजर नहीं आते सेना के जांबाज स्नाइपर
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 11 Oct 2016 04:15 PM IST
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Indian Army
- फोटो : Amar Ujala
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तकनीक और साहस मिलकर एलओसी की निगरानी करते हैं। इलाका दुरूह होने की वजह से चप्पे-चप्पे पर नजर रखना मुश्किल है, लेकिन अग्रिम चौकियों पर जान जोखिम में डालकर इस काम को अंजाम दिया जाता है। इन दिनाें एलओसी पर तनावपूर्ण शांति है। अग्रिम चौकियाें पर लाल झंडा नजर आता है। जो खतरे का निशान है।
इसी वजह से एलओसी की दोनों तरफ खास एहतियात बरती जा रही है। एलओसी की अग्रिम चौकी पर तनावपूर्ण शांति का बखूबी अहसास हुआ।छोटे हथियारों की रेंज से दूर होने के बावजूद सुरक्षा बलों को बेहद सतर्क रहना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह गोलाबारी का खतरा है।
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इसी वजह से एलओसी की दोनों तरफ खास एहतियात बरती जा रही है। एलओसी की अग्रिम चौकी पर तनावपूर्ण शांति का बखूबी अहसास हुआ।छोटे हथियारों की रेंज से दूर होने के बावजूद सुरक्षा बलों को बेहद सतर्क रहना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह गोलाबारी का खतरा है।
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इसके अलावा स्नाइपर शूटरों की जगह-जगह तैनाती भी है। इसी तरह से एलओसी के इस पार भी स्नाइपर शूटर तैनात किए गए हैं। एक सैन्य अफसर ने बताया कि 1200 मीटर की दूरी से एक गोली एक शिकार करने में सक्षम स्नाइपर गन बेहद मारक हथियार है।
दोनों तरफ से स्नाइपर शूटर तैनात हैं, जिससे अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। स्नाइपर शूटर की खास बात है कि पास होकर भी ये आसानी से नजर नहीं आते। झाड़ियों में एक ही जगह घंटों घात लगाकर बिना हलचल के पोजीशन लिए रहते हैं। दूरबीन से भी इनकी पोजीशन पता नहीं चलती।
दोनों तरफ से स्नाइपर शूटर तैनात हैं, जिससे अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। स्नाइपर शूटर की खास बात है कि पास होकर भी ये आसानी से नजर नहीं आते। झाड़ियों में एक ही जगह घंटों घात लगाकर बिना हलचल के पोजीशन लिए रहते हैं। दूरबीन से भी इनकी पोजीशन पता नहीं चलती।