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मचेल यात्रा: यूटीएआईआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज
जेएनएफ/जम्मू
Updated Thu, 30 Jun 2016 10:17 PM IST
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- फोटो : Demo Pic.
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यूटीएआईआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। इस कंपनी ने अपनी याचिका के माध्यम से मचेल माता यात्रा के लिए हेलीकाप्टर सेवा के लिए नए सिरे से टेंडर करने के नोटिस को रद्द करने की मांग की थी।
याची ने दावा किया था कि पहले जारी टेंडर नोटिस में उसकी ओर से हेलीकाप्टर सेवा के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। इसके चलते हेलीकाप्टर सेवा का टेंडर उसे दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिवादी पक्ष को टेंडर देते समय डीजीसीए के नियमों का पालन करने के निर्देश जारी किए।
मामले मेें याची की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट आरके गुप्ता और राहुल पंत तथा प्रतिवादी की ओर से एडवोकेट सुदर्शन शर्मा और संजीव पाधा की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि जिस बैठक में 31 मार्च, 2016 को मचेल माता यात्रा के लिए हेलीकाप्टर सेवा के लिए जारी हुए टेंडर नोटिस को रद्द करने पर सहमति बनी थी, उसमें याची पक्ष का प्रतिनिधि भी मौजूद था।
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उसकी ओर से भी टेंडर नोटिस रद्द करने और हेलीकाप्टर सेवा के लिए नए सिरे से टेंडर नोटिस जारी करने के लिए सहमति जताई गई थी। कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों की ओर से पेश तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि याची के साथ अनुचित व्यवहार नहीं किया है और न ही प्रतिवादी पक्ष की ओर से मनमाना रवैया अपनाया गया।
लिहाजा, कोर्ट की ओर से याची पक्ष के दावे को खारिज करते हुए प्रतिवादी पक्ष को हेलीकाप्टर सेवा की टेंडरिंग प्रक्रिया में डीजीसीए के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए गए।
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याची ने दावा किया था कि पहले जारी टेंडर नोटिस में उसकी ओर से हेलीकाप्टर सेवा के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। इसके चलते हेलीकाप्टर सेवा का टेंडर उसे दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिवादी पक्ष को टेंडर देते समय डीजीसीए के नियमों का पालन करने के निर्देश जारी किए।
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मामले मेें याची की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट आरके गुप्ता और राहुल पंत तथा प्रतिवादी की ओर से एडवोकेट सुदर्शन शर्मा और संजीव पाधा की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि जिस बैठक में 31 मार्च, 2016 को मचेल माता यात्रा के लिए हेलीकाप्टर सेवा के लिए जारी हुए टेंडर नोटिस को रद्द करने पर सहमति बनी थी, उसमें याची पक्ष का प्रतिनिधि भी मौजूद था।
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उसकी ओर से भी टेंडर नोटिस रद्द करने और हेलीकाप्टर सेवा के लिए नए सिरे से टेंडर नोटिस जारी करने के लिए सहमति जताई गई थी। कोर्ट ने माना कि दोनों पक्षों की ओर से पेश तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि याची के साथ अनुचित व्यवहार नहीं किया है और न ही प्रतिवादी पक्ष की ओर से मनमाना रवैया अपनाया गया।
लिहाजा, कोर्ट की ओर से याची पक्ष के दावे को खारिज करते हुए प्रतिवादी पक्ष को हेलीकाप्टर सेवा की टेंडरिंग प्रक्रिया में डीजीसीए के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए गए।