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हाफिज सईद से ध्यान हटाने के लिए जरगर का हुआ इस्तेमाल
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 16 Oct 2016 05:05 PM IST
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हाफिज सईद
- फोटो : Getty Images
पंद्रह साल बाद आतंकी मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लटरन का नाम सामने लाना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की नई चाल है। भारतीय एजेंसियों का हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर से ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया गया है। इसलिए जरगर के नाम को श्रीनगर के एसएसबी पार्टी पर हुए आतंकी हमले के साथ जोड़ा गया।
जमीनी सतह पर जरगर का आतंकी संगठन डिफंक्ट पड़ा हुआ है। भारतीय एजेंसियों के पास इसके सक्रिय होने की कोई जानकारी नहीं है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि जरगर जमीनी हकीकत में बहुत कमजोर है। वह पिछले पंद्रह साल में पीओके के मुजफ्फराबाद में रह रहा है।
लश्कर और जैश के कमजोर पड़ने पर उसका नाम सामने लाया गया है, ताकि भारतीय एजेंसियों का ध्यान बंटा कर सीमा पार से घुसपैठ कराई जाए। साथ ही भारतीय एजेंसियों पर दबाव बनाया जाए कि इन दोनों संगठनों के अलावा और भी संगठन हैं, जो कश्मीर में सेना को निशाना बना सकते हैं। हाफिज और मसूद को मजबूत करने के लिए जरगर का नाम सामने लाया जा रहा है।
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जमीनी सतह पर जरगर का आतंकी संगठन डिफंक्ट पड़ा हुआ है। भारतीय एजेंसियों के पास इसके सक्रिय होने की कोई जानकारी नहीं है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि जरगर जमीनी हकीकत में बहुत कमजोर है। वह पिछले पंद्रह साल में पीओके के मुजफ्फराबाद में रह रहा है।
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लश्कर और जैश के कमजोर पड़ने पर उसका नाम सामने लाया गया है, ताकि भारतीय एजेंसियों का ध्यान बंटा कर सीमा पार से घुसपैठ कराई जाए। साथ ही भारतीय एजेंसियों पर दबाव बनाया जाए कि इन दोनों संगठनों के अलावा और भी संगठन हैं, जो कश्मीर में सेना को निशाना बना सकते हैं। हाफिज और मसूद को मजबूत करने के लिए जरगर का नाम सामने लाया जा रहा है।
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जरगर ने किया था महबूबा मुफ्ती की बहन का अपहरण
महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
मुश्ताक जरगर कश्मीर के डाउन टाउन के राजोरी कद्दल का रहने वाला है। वह जेकेएलएफ के साथ जुड़ा था और 1988 में पीओके में आतंकी कैंप में ट्रेनिंग लेने चला गया। मुश्ताक को लटरन के नाम से जाना जाता है।
1989 में कश्मीर में आतंकवाद शुरू होनेे के वक्त जरगर ने 40 कश्मीरी पंडितों की हत्या की। 1993 में वह भारत के हाथ लगा और उसे जम्मू की कोट भलवाल जेल में रखा। 1999 में कंधार कांड के दौरान जरगर का नाम मशहूर हुआ।
जब आतंकी मौलाना मसूद अजहर, उमर सई के साथ इसे भी रिहा किया गया। तबसे वह पीओके में रह रहा है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन रुबैइया का अपहरण भी जरगर ने किया।
1989 में कश्मीर में आतंकवाद शुरू होनेे के वक्त जरगर ने 40 कश्मीरी पंडितों की हत्या की। 1993 में वह भारत के हाथ लगा और उसे जम्मू की कोट भलवाल जेल में रखा। 1999 में कंधार कांड के दौरान जरगर का नाम मशहूर हुआ।
जब आतंकी मौलाना मसूद अजहर, उमर सई के साथ इसे भी रिहा किया गया। तबसे वह पीओके में रह रहा है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन रुबैइया का अपहरण भी जरगर ने किया।
सिरदर्द बढ़ाने के लिए एक और नाम
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जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एमएम खजुरिया का कहना है कि जरगर कश्मीर में खूंखार रहा है। संभव है कि वह दोबारा सक्रिय हो, लेकिन इसका एक ही मकसद है कि भारतीय एजेंसियों पर दबाव बनाया जाए।
हाफिज, मसूद, सलाहुद्दीन को मजबूत करने के लिए एक नाम और जोड़ा जा रहा है, लेकिन एजेंसियों को इसे हलके में नहीं लेना चाहिए और इसकी जांच करनी चाहिए कि यह नाम सही है या नहीं। गौरतलब है कि एसएसबी के काफिले पर शुक्रवार को हुए हमले के बाद जरगर ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी ।
हाफिज, मसूद, सलाहुद्दीन को मजबूत करने के लिए एक नाम और जोड़ा जा रहा है, लेकिन एजेंसियों को इसे हलके में नहीं लेना चाहिए और इसकी जांच करनी चाहिए कि यह नाम सही है या नहीं। गौरतलब है कि एसएसबी के काफिले पर शुक्रवार को हुए हमले के बाद जरगर ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी ।