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पेलेट गन के उपयोग पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 03 Aug 2016 12:14 AM IST
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अदालत
- फोटो : Demo Pic.
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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने केंद्र एवं जम्मू सरकार को नोटिस जारी करते हुए घाटी मेें भीड़भाड़ में पेलेट गन के उपयोग पर रिपोर्ट तलब की।
मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश अली मोहम्मद मागरे की खंडपीठ ने कहा कि 17 अगस्त को इस मामले में सुनवाई होगी। उससे पहले दोनों सरकारों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
कश्मीर बार एसोसिएशन ने कोर्ट में अर्जी दी कि पेलेट गन का उपयोग नहीं किया जाए। कानून की व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ ने पेलेट गन का उपयोग किया है। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पेलेट गन का उपयोग सही नहीं है। उस पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।
कश्मीर में आठ जुलाई के बाद से भीड़ पर पेलेेट गन का उपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कई मासूम लोग घायल हुए। उन्हें मुआवजा देने के बजाय केवल डाक्टरों से ही उनका उपचार किया गया।
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जम्मू कश्मीर और बाहर राज्यों में भी उनका उपचार हुआ। खजाना प्रभावित हुआ है। पैरा मिल्ट्री फोर्स ने इसका भरपूर इस्तेमाल किया गया। कई लोगों की आंखें भी प्रभावित हुईं हैैं। इस मामले में हाईकोर्ट पहले भी आदेश जारी कर चुका है कि केवल प्रशिक्षित सीआरपीएफ जवानों को ही भीड़ व हिंसा पर काबू करने के लिए तैनात किया जाए।
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मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश अली मोहम्मद मागरे की खंडपीठ ने कहा कि 17 अगस्त को इस मामले में सुनवाई होगी। उससे पहले दोनों सरकारों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
कश्मीर बार एसोसिएशन ने कोर्ट में अर्जी दी कि पेलेट गन का उपयोग नहीं किया जाए। कानून की व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ ने पेलेट गन का उपयोग किया है। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पेलेट गन का उपयोग सही नहीं है। उस पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।
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कश्मीर में आठ जुलाई के बाद से भीड़ पर पेलेेट गन का उपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कई मासूम लोग घायल हुए। उन्हें मुआवजा देने के बजाय केवल डाक्टरों से ही उनका उपचार किया गया।
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जम्मू कश्मीर और बाहर राज्यों में भी उनका उपचार हुआ। खजाना प्रभावित हुआ है। पैरा मिल्ट्री फोर्स ने इसका भरपूर इस्तेमाल किया गया। कई लोगों की आंखें भी प्रभावित हुईं हैैं। इस मामले में हाईकोर्ट पहले भी आदेश जारी कर चुका है कि केवल प्रशिक्षित सीआरपीएफ जवानों को ही भीड़ व हिंसा पर काबू करने के लिए तैनात किया जाए।